अकरस जुताई के फायदे: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर पंचायत मल्हार के किसान जदुनंदन प्रसाद वर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीक “अकरस जुताई” को अपनाया और आज वह खुद इसकी सफलता के गवाह हैं.
उनका मानना है कि जो किसान अपनी मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना चाहते हैं, उन्हें हर कुछ वर्षों में अकरस यानी गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए. यह सिर्फ उपज बढ़ाने का तरीका नहीं, बल्कि खेत को पुनर्जीवित करने का तरीका है.
खरीफ फसलों के लिए गर्मी में होती है सही शुरुआतजदुनंदन वर्मा बताते हैं कि खरीफ फसलेंजैसे धान, मक्का और सोयाबीनकी अच्छी उपज के लिए मई-जून में खेत की तैयारी बेहद ज़रूरी होती है. गर्मी के मौसम में की गई जुताई से मिट्टी की ऊपरी परत सूखती है और भीतर तक टूटकर खुल जाती है, जिससे हवा और पानी का संचार बेहतर होता है.
अकरस जुताई यानी मिट्टी को फिर से सांस लेने देनावह कहते हैं कि हर साल सतही जुताई करने से मिट्टी की नीचे की परत सख्त हो जाती है. अकरस जुताई यानी डीप प्लाउइंग से ये कठोर परत टूटती है. इससे जड़ों को गहराई तक फैलने का मौका मिलता है, और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है.
कीट, खरपतवार और लागततीनों पर कंट्रोलअकरस जुताई का एक बड़ा फायदा यह भी है कि मिट्टी में छिपे कीटों के अंडे और खरपतवार की जड़ें नष्ट हो जाती हैं. इससे रसायनों की ज़रूरत घटती है और प्राकृतिक संतुलन बना रहता है.
बेहतर जड़ें, मजबूत पौधे, ज़्यादा उत्पादनअंत में वर्मा कहते हैं कि इस तकनीक से न केवल पौधे मजबूत बनते हैं, बल्कि उपज में भी साफ़ अंतर दिखता है. उत्पादन बढ़ता है और लागत में बचत होती है. उनका सुझाव है कि हर किसान को हर 3-4 साल में एक बार अकरस जुताई जरूर करनी चाहिए.
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