Last Updated:May 06, 2025, 14:23 ISTछत्तीसगढ़ में मटर की उन्नत किस्म ‘इगल गोल्ड (GC-10)’ किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है. वैज्ञानिक विधियों से कम लागत में अधिक उपज मिल रही है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ रही है और बाजार में अच्छी कीमत भी म…और पढ़ेंX
मटर की खेतीहाइलाइट्सइगल गोल्ड (GC-10) मटर की नई किस्म से किसानों की आमदनी बढ़ी.वैज्ञानिक विधियों से कम लागत में अधिक उपज मिल रही है.छत्तीसगढ़ के किसान रबी सीजन में मटर की खेती की ओर आकर्षित.रामकुमार नायक/रायपुर- छत्तीसगढ़ के किसान अब रबी सीजन में मटर की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. खासतौर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा अनुशंसित उन्नत किस्म ‘इगल गोल्ड (GC-10)’ ने किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी का रास्ता दिखाया है.
बीज मात्रा और बोआई की वैज्ञानिक विधिइस किस्म की मटर की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 75-80 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीजों को 2.0 ग्राम/किलोग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना जरूरी है. पौधों को त्रिभुजाकार विधि से रोपा जाता है, जिसमें कतारों के बीच 90 सेमी और पौधों के बीच 60 सेमी की दूरी रखी जाती है.पॉलीहाउस तकनीक की मदद से किसान वर्षभर इसकी खेती कर सकते हैं.
खाद और उर्वरक का संतुलित उपयोगखेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक है.
15-20 टन गोबर खाद
40 किलो नत्रजन, 50 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर
ड्रिप सिंचाई प्रणाली को सबसे बेहतर माना गया है. हर दो दिन में 30 मिनट तक पोषक जल देने की सिफारिश की जाती है. इसके साथ ही फर्टिगेशन के ज़रिए NPK (19:19:19, 12:61:0, 13:0:45) अनुपात में 2 किग्रा/हेक्टेयर की डोज दी जाती है.
खरपतवार और कीट नियंत्रण की तकनीकखरपतवार नियंत्रण के लिए हैंड वीडिंग तकनीक अपनाई जाती है.
पहली बार 20 दिन और दूसरी बार 35 दिन के बाद.
कीट नियंत्रण के लिए लीफ माइनर से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्सजाम की 0.35-0.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव. रोग नियंत्रण के लिए केल्सीनियम या पेनकोनाजोल का 1 मि.ली. मात्रा 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाता है.
अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्यवैज्ञानिकों के अनुसार, इस उन्नत तकनीक को अपनाकर प्रति हेक्टेयर 12-14 टन हरी मटर की उपज प्राप्त की जा सकती है. हरी मटर की बाजार में बढ़ती मांग किसानों को अच्छा लाभ दिला रही है. यह पारंपरिक खेती की तुलना में कम लागत और अधिक आमदनी का बेहतर विकल्प बन गया है.
किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का सुनहरा अवसरछत्तीसगढ़ के किसान यदि इस वैज्ञानिक विधि और उन्नत बीज किस्म को अपनाते हैं, तो वे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी को भी दोगुना करने की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं.
Location :Raipur,Chhattisgarhhomeagricultureकम लागत, ज्यादा मुनाफा! मटर की इस नई किस्म ने बदल दी किसानों की किस्मत
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