करोड़ों का बिजनेस करता था कपल, अचानक मिला 1 हजार करोड़ का ऑर्डर, असलियत जान लग गया झटका



Last Updated:May 08, 2025, 17:00 ISTChhattisgarh News: पत्थलगांव में करीब 150 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है. सप्लाई दिलाने के नाम पर व्यापारियों से ठगी करने वाली इस ‘बंटी-बबली’ जोड़ी को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.जशपुर में ठगी का खुलासा.हाइलाइट्सछत्तीसगढ़ में 150 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया.पुलिस ने ‘बंटी-बबली’ जोड़ी को दिल्ली से गिरफ्तार किया.जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां के पत्थलगांव में करीब 150 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है. सप्लाई दिलाने के नाम पर व्यापारियों से ठगी करने वाली इस ‘बंटी-बबली’ जोड़ी को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. मगर, जोड़ी की करतूतों को सुन हर कोई दंग है. ये जोड़ी पुलिस की गिरफ्त में बहुत आसानी से नहीं आई है. आइए बताते हैं पूरा मामला…

यह है मामलारत्नाकर उपाध्याय और अनिता उपाध्याय मिलकर एक ट्रस्ट चलाते थे. असल में ये कोई ट्रस्ट नहीं बल्कि उनके ठगी का जरिया था. उनके इस गोरखधंधे में और भी लोग शामिल थे. इन लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस ने खुद को मंत्रालय का अधिकारी बताकर एक हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर का लालच देकर ठगों को दबोच लिया. गिरफ्तारी के दौरान ठगों ने खूब हंगामा किया और यहां तक कि एसडीओपी के साथ मारपीट भी कर दी.

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अमित ने दी थी शिकायतपत्थलगांव के रहने वाले अमित कुमार अग्रवाल ने 20 अप्रैल को पुलिस को शिकायत दी थी. उन्होंने बताया था कि उनके साथ अनीता उपाध्याय नामक महिला ने अपने साथियों सौरभ सिंह, रत्नाकर उपाध्याय और प्रांशु अग्रवाल के साथ मिलकर एक सरकारी मिशन के नाम से स्वेटर सप्लाई करने के लिए 5 करोड़ 70 लाख रुपये का ऑर्डर ले लिया. इसके बाद पता चला की हमारे साथ ठगी की गई. इस पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी.

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर शशि मोहन सिंह ने एसडीओपी ध्रुवेश कुमार जायसवाल के नेतृत्व में एक टीम गठित की. टीम तुरंत दिल्ली रवाना हुई. वहां लगातार पुलिस मॉनिटरिंग कर रही थी. आरोपी इतने शातिर थे कि आपस में केवल वाईफाई के जरिए वॉट्सएप पर बात करते थे और मोबाइल फोन ज्यादातर बंद रखते थे. इससे पुलिस इन अपराधियों का पता नहीं लगा पा रही थी.

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ऐसे आरोपियों को पकड़ाइस दौरान अनीता का मोबाइल कुछ देर के लिए खुला. वह अपने कस्टमर से बात कर रही थी. पुलिस ने तुरंत अनीता से संपर्क कर खुद को मंत्रालय का अधिकारी बताकर एक हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर का लालच दिया और मिलने के लिए बुलाया. पहले तो अनीता ने मिलने से मना किया, मगर फिर मान गई. सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी मंत्रालय का प्रतिनिधि बनाकर भेजा. उन्होंने अनीता को यकीन दिलाया कि वे एक बड़ा ऑर्डर दिला सकते हैं. बशर्ते की रत्नाकर से मीटिंग हो.

अनीता द्वारा किए गए फोन नंबर को ट्रेस करने पर रत्नाकर की लोकेशन मिल गई. फिर दोनों को सागरपुर के एक मेडिकल स्टोर से पकड़ लिया और रिमांड पर जेल भेज दिया. अब जांच में पता चला है कि इन सबने 150 करोड़ रुपये की ठगी की है.
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