जशपुर मुनादी।। कुनकुरी नगर पंचायत की राजनीति इन दिनों कांग्रेस के अंदर “हाईवोल्टेज ड्रामे” नहीं बल्कि हाइलेवल गुटबाजी के भंवर में फंसी है। नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील को लेकर पार्टी के भीतर मचा बवाल अब थमने का नाम नहीं ले रहा।
दरअसल, पीआईसी मेम्बर रुखसाना बानो को हटाकर सीनियर कांग्रेसी पार्षद अजित किस्पोट्टा को पीआईसी बनाये जाने के बाद कुनकुरी की नगर पंचायत सरकार में गहरी दरार पड़ गई है।
कांग्रेस के पार्षद अब दो गुटों में बंट गए हैं — एक गुट अध्यक्ष विनयशील के विरोध में, तो दूसरा उनके समर्थन में खुलकर मैदान में है।
पीआईसी बदलने से उठी सियासी आग
रुखसाना बानो को हटाए जाने के बाद अंजुमन इस्लामिया कमेटी ने इसे मुस्लिम समाज के “सम्मान का मुद्दा” बना दिया है।
दूसरी ओर, नगर पंचायत के चार ईसाई पार्षद नए पीआईसी अजित किस्पोट्टा के समर्थन में आ खड़े हुए हैं।
मामला मामूली दिखने के बावजूद इतना बड़ा रूप क्यों ले गया?
दरअसल, पीआईसी सदस्य को हटाना अध्यक्ष का विशेषाधिकार है और अधिकांश नगर पंचायतों में यह फेरबदल सामान्य प्रक्रिया होती है।
लेकिन इस बार यह मामला कुनकुरी से निकलकर सीधे राजधानी रायपुर के राजनीतिक गलियारे तक जा पहुंचा है।
जिलाध्यक्ष पद की दौड़ से शुरू हुई थी हलचल
सूत्र बताते हैं कि बवाल की जड़ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पद की रेस है।
जिले में भूपेश बघेल, सीडी महंत, टी.एस. सिंहदेव (बाबा) और दीपक बैज — चारों गुटों के समर्थक अपने-अपने नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाने में जुटे हैं।
इस बीच कुनकुरी के युवा अध्यक्ष विनयशील ने भी जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी ठोक दी, जिससे माहौल गर्मा गया।
कम समय में तेजतर्रार नेता के रूप में उभरे विनयशील की दावेदारी से कई खेमों में हलचल मच गई।
तभी से कुनकुरी कांग्रेस में “हाइलेवल खेमेबाजी” शुरू हो गई थी, जो अब खुले तौर पर “महाभारत” बन चुकी है।
आग में घी का काम बनी रुखसाना की बर्खास्तगी
इसी गुटबाजी के बीच विनयशील ने रुखसाना बानो को हटाकर अजित किस्पोट्टा को पीआईसी बना दिया — और यही फैसला विवाद की चिंगारी साबित हुआ।
अंजुमन इस्लामिया कमेटी ने विनयशील के खिलाफ लिखित शिकायत पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को भेजी।
इसके बाद उपाध्यक्ष दीपक केरकेट्टा और अध्यक्ष के करीबी पार्षद इमरान ने भी विरोध दर्ज करते हुए पीआईसी से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी।
विनयशील पर “दबंगई” के आरोप लगने लगे।
हालांकि बाद में अंजुमन द्वारा भेजे गए पत्र को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी — कुछ मुस्लिम नेता उसे फर्जी बता रहे थे, लेकिन अंततः अंजुमन के सदर को मीडिया के सामने आकर पत्र की प्रामाणिकता स्वीकारनी पड़ी।
ईसाई पार्षद ने भी दिया बयान
नए पीआईसी सदस्य अजित किस्पोट्टा ने खुद को रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय से बताते हुए कहा कि वे नगर पंचायत के सबसे सीनियर कांग्रेसी पार्षद हैं।
उन्होंने पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को लिखे पत्र में बताया कि पूर्व विधायक यू.डी. मिंज और अध्यक्ष विनयशील ने उन्हें जिम्मेदार पद देने का वादा किया था, जिसे अब निभाया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी अब उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
भूपेश खेमे बनाम बाकी गुट
राजनीतिक हलकों में इस पूरे प्रकरण को भूपेश बघेल खेमे बनाम अन्य गुटों की जंग माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, विनयशील भूपेश बघेल के अत्यंत करीबी हैं।
नगर पंचायत चुनाव में खुद पूर्व सीएम भूपेश बघेल दो बार कुनकुरी पहुंचे थे और खुले मंच से विनयशील का समर्थन किया था।
कहा जा रहा है कि विनयशील की उम्मीदवारी से लेकर उनकी जीत तक भूपेश बघेल की सीधी भूमिका रही, और अब जब उन्होंने जिलाध्यक्ष की दावेदारी ठोकी, तब विरोधी गुट सक्रिय हो उठे।
सोशल मीडिया में “कुनकुरी कांग्रेस महाभारत” ट्रेंड पर
कुनकुरी की यह अंतर्कलह अब पूरे जशपुर जिले में चर्चा का विषय बन गई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “कुनकुरी कांग्रेस महाभारत” ट्रेंड कर रहा है।
लोग इसे कांग्रेस के भीतर की हाइलेवल गुटबाजी का नतीजा बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह विवाद अब केवल नगर पंचायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक शक्ति-संतुलन की लड़ाई में तब्दील हो गया है।
कांग्रेस के भीतर कुनकुरी की यह जंग अब संगठन से आगे बढ़कर “गुट बनाम गुट” की ताकत की परीक्षा बन चुकी है।
अब देखना यह होगा कि इस “महाभारत” में विजेता कौन बनता है — विनयशील या उनके विरोधी गुट?
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