Last Updated:May 17, 2025, 10:01 ISTकृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा जारी एक सूचना के अनुसार, ‘ग्रीन चैलेंजर’ नामक संकर किस्म की पत्तागोभी खेती में बेहतरीन नतीजे दे सकती है. इससे प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक उपज मिलने की संभावना है, जो कि परंपरा…और पढ़ेंX
पत्तागोभी की खेतीछत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अच्छी खबर है. पत्तागोभी की खेती अब और भी आसान और लाभदायक बन सकती है, अगर वैज्ञानिक तरीके और उन्नत किस्मों का इस्तेमाल किया जाए. हाल ही में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा जारी एक सूचना के अनुसार, ‘ग्रीन चैलेंजर’ नामक संकर किस्म की पत्तागोभी खेती में बेहतरीन नतीजे दे सकती है. इससे प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक उपज मिलने की संभावना है, जो कि परंपरागत खेती के मुकाबले अधिक है.
इस किस्म की विशेषता यह है कि इसे 300-500 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बोया जाता है. बीजों को बुवाई से पहले कार्बेन्डाजिम दवा से 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित किया जाता है, जिससे फफूंदजनित रोगों से सुरक्षा मिलती है. खेत की पंक्तियों का विन्यास 90X60 सेंटीमीटर (कतार x पौधा) के त्रिभुजाकार रूप में किया जाता है, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और उत्पादन बढ़ता है.
बुवाई की उर्वरक प्रबंधनखेत की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए 20 टन गोबर खाद के साथ-साथ नत्रजन-100 किलो, फास्फोरस – 60 किलो और पोटाश-60 किलो प्रति हेक्टेयर दिया जाना चाहिए. सिंचाई के लिए ड्रिप विधि अपनाने की सिफारिश की गई है. प्रत्येक दो दिन के अंतराल में एनपीके का 19:19:19, 12:61:00, 13:00:45 अनुपात में उर्वरक 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से दिया जाना चाहिए. उर्वरकों के साथ हर दो दिन में फर्टिगेशन से पौधों को पोषण की निरंतर आपूर्ति होती है.
खरपतवार और कीट-रोग प्रबंधनखरपतवार नियंत्रण के लिए एक हेंडवीडिंग 20 दिन बाद और दूसरी 40 दिन बाद की जाती है. कीट नियंत्रण के लिए सरसों की फसल में आने वाले आरा मक्खी के लिए कराटे हाइड्रोक्लोराइड 1 मिली/लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए. डायमंड बैक मॉट जैसे कीटों से बचाव के लिए एमामेक्टिन बेंजोएट 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना फायदेमंद होता है.
रोग नियंत्रण भी उतना ही जरूरीपत्तागोभी में आने वाले फफूंद जनित रोगों के नियंत्रण के लिए क्लोरोथैलेनिल या काक्सानिल दवा का छिड़काव 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से करना चाहिए. इससे पौधों की पत्तियां हरी-भरी और स्वस्थ बनी रहती हैं. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इन वैज्ञानिक विधियों और सटीक सलाह का पालन किया जाए, तो किसानों को पत्तागोभी की खेती से अच्छा मुनाफा मिल सकता है. बढ़ती मांग और उन्नत किस्मों के उपयोग से यह फसल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो सकती है.
Location :Bilaspur,Chhattisgarhhomeagricultureकिसान करें इस किस्म की पत्तागोभी खेती, सलाना होगी लाखों की कमाई
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