Last Updated:May 06, 2025, 18:40 ISTगुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यार्थियों को मधुमक्खी पालन और सूरजमुखी की खेती से व्यावसायिक कौशल सिखाया, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं और स्…और पढ़ेंX
मधुमक्खी पालन और सूरजमुखी की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे छात्र.हाइलाइट्सगांव के छात्रों ने शहद का बिजनेस शुरू किया.सूरजमुखी की खेती से शहद उत्पादन में वृद्धि.विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल सिखाया जा रहा है.बिलासपुर- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा को व्यावसायिक, प्रायोगिक और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग के विद्यार्थियों ने सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ मधुमक्खी पालन और सूरजमुखी की खेती को अपनाकर न केवल व्यावसायिक कौशल सीखा है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है.
मधुमक्खी पालन का व्यावसायिक अभ्यासग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दिलीप कुमार के मार्गदर्शन में बीएससी द्वितीय वर्ष के 60 विद्यार्थियों ने मधुमक्खी पालन की गतिविधियां शुरू की हैं. ये छात्र नियमित रूप से मधुमक्खियों की देखभाल, उनके छत्तों की सफाई, भोजन व्यवस्था और उनके व्यवहार का वैज्ञानिक तरीके से अवलोकन कर रहे हैं. विद्यार्थियों को शहद उत्पादन और विपणन की प्रक्रिया से भी अवगत कराया जा रहा है, जिससे वे इसे भविष्य में स्वरोजगार के रूप में अपना सकें.
सूरजमुखी की खेती का महत्वमधुमक्खी पालन के साथ-साथ सूरजमुखी की खेती को भी महत्व दिया गया है. सूरजमुखी के फूल मधुमक्खियों को पराग और मधु प्रदान करते हैं, जिससे शहद उत्पादन में वृद्धि होती है. इस खेती को समांतर अभ्यास के रूप में लागू किया गया है, जो कृषि और पशुपालन गतिविधियों को एक-दूसरे का पूरक बनाता है. सूरजमुखी की खेती का तरीका, जैसे भूमि की तैयारी, बुवाई, खाद और सिंचाई, और रोग नियंत्रण, विद्यार्थियों को पर्यावरण के अनुकूल खेती की दिशा में मार्गदर्शन दे रहा है.
स्वावलंबी योजना और कौशल विकासकुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल की पहल पर विश्वविद्यालय में स्वावलंबी छत्तीसगढ़ी योजना और कौशल विकास योजना चलाई जा रही है. इसके तहत विद्यार्थियों को उद्यमिता, स्वरोजगार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक खर्चों को खुद वहन करने का अवसर मिला है, जैसे मशरूम उत्पादन और प्राकृतिक गुलाल निर्माण.
विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता का उत्साहगुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों में उत्साह और आत्मनिर्भरता का भाव पैदा कर रही है. वे इसे एक स्थायी आजीविका के रूप में देख रहे हैं और भविष्य में इसे जारी रखने की इच्छा रखते हैं. इस पहल से न केवल ज्ञानवर्धन हो रहा है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक ठोस कदम साबित हो रहा है.
Location :Bilaspur,Chhattisgarhhomeagricultureगांव के छात्रों ने शुरू किया शहद का बिजनेस, सूरजमुखी की खेती से हुआ डबल फायदा
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