Last Updated:May 06, 2025, 23:49 ISTchhattisgarh news in hindi today: गेरावं के ग्रामीणों ने प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर एक स्थायी कृषि मॉडल विकसित किया है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और खुशहाल बनाता है.X
Image कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित गेरावं गांव अपनी अनूठी कृषि पद्धति के कारण सुर्खियों में है. घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे इस गांव के लोग मानते हैं कि उनके गांव में कभी अकाल नहीं पड़ सकता. यहां के लोगों को प्रकृति का वरदान मिला हुआ है. यहां पहाड़ से निकलने वाला पानी साल भर किसानों के खेतों को हरा-भरा रखता है.
यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. इसकी असली पहचान यहां की सालभर चलने वाली खेती है. गर्मी के दिनों में जब आसपास के इलाकों में पानी की कमी से त्राहिमाम मची होती है तब गेरावं के खेत हरे-भरे लहलहाते रहते हैं.
गांव के किसान खेम सिंह राठिया बताते हैं कि गेरावं के किसान साल भर खेती करते हैं. इसका मुख्य कारण है यहां पानी की सुविधा. गेरावं गांव, बिठराही पहाड़ के नीचे बसा हुआ है. यह पहाड़ ग्रामीणों के लिए देवतुल्य है. पहाड़ से निकलने वाला पानी एक छोटे से नाले का रूप लेकर गांव के भीतर आता है और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराता है.
खेम सिंह राठिया बताते हैं कि वर्तमान में गर्मी के मौसम में भी गांव के किसान मूंगफली, उड़द और धान की खेती कर रहे हैं. इस गांव के किसान खेतों से दो फसलों का भी लाभ लेते है. दो बार धान की बुआई से इन्हें अतिरिक्त चावल मिल जाता है. पहाड़ से निकलने वाला पानी इन फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त है, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद है.
गेरावं गांव की यह अनूठी कृषि पद्धति अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक है. यह दर्शाता है कि प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करके अकाल जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है. गेरावं के ग्रामीणों ने प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर एक स्थायी कृषि मॉडल विकसित किया है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और खुशहाल बनाता है.
Location :Korba,Chhattisgarhhomechhattisgarhछत्तीसगढ़ का यह गांव सूखा और अकाल से है बेफिक्र, साल भर ऐसे लहलहाते हैं खेत
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