जांजगीर चांपा. हर घर से एक फौजी, हर दिल में देशभक्ति किरित गांव में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां से कोई सेना में न गया हो, यहां के बच्चों का सपना बचपन से ही एक ही होता है. वर्दी पहनना और देश की सेवा करना, सुबह की शुरुआत गांव में दौड़ और शारीरिक अभ्यास से होती है, और यह सिलसिला तब तक नहीं रुकता जब तक गांव के मैदान से ‘जय हिंद’ की गूंज न सुनाई दे. किरित गांव देशभक्ति की मिट्टी में पला-बढ़ा एक अनोखा गांव, जहां हर सुबह देश के लिए धड़कता है दिल, और हर घर से निकलता है एक फौजी, आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में बसा एक छोटा-सा गांव किरित पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है.
इस गांव की खासियत यह है कि यहां के 100 से भी अधिक युवक भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं, जिसमें से कुछ थलसेना में हैं, तो कुछ वायुसेना और नौसेना में भी कार्यरत हैं, यह गांव देशभक्ति की एक जीवंत मिसाल है. इसलिए इस गांव को सैनिक नगरी भी कहा जाता हैं.
ग्रामीण और सैनिक के पिता अमृतलाल चंद्रा ने बताया की किरित गांव सिर्फ एक नाम नहीं, यह देशभक्ति की मिसाल है, यहां के बच्चों की आंखों में वर्दी का सपना है, और कदमों में वह जज़्बा जो देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है, यह गांव पूरे देश को यह संदेश देता है, अगर इरादा मजबूत हो, तो हर गांव एक प्रेरणा बन सकता है. सैनिक के पिता घसियाराम साहू ने बताया की सुबह 3 बजे उठकर ट्रेनिंग होती है.
यह गांव केवल सपने नहीं देखता, उन्हें साकार भी करता है सुबह 3 बजे से ही गांव के 40 से 50 बच्चे मैदान में उतर जाते हैं, जहां उन्हें प्रशिक्षण देने का जिम्मा संभालते हैं गांव के ही एक रिटायर्ड सैनिक, अनुशासन, मेहनत और समर्पण के साथ दी जाने वाली यह ट्रेनिंग इन युवाओं को फिजिकल टेस्ट से लेकर मानसिक रूप से भी सेना के लिए तैयार करती है, राजन कुमार पात्रे ने कहा की पुरानी परंपरा, नई प्रेरणा गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा नई नहीं है, दशकों पहले जब कोई फौजी गांव लौटता था, तो पूरा गांव उसे फूलों से स्वागत करता था, उसकी वीरता की कहानियाँ बच्चों को सुनाई जाती थीं, और वही कहानियाँ आज बच्चों के मन में देशसेवा की लौ जलाए हुए हैं.