Last Updated:May 23, 2025, 14:56 ISTAgriculture News: खरीफ सीजन में अधिक लाभ के लिए एक्सपर्ट ने किसानों को जमीन की प्रकृति के अनुसार फसल चुनने, उन्नत बीजों की समय पर व्यवस्था करने और जैविक खेती को अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि नौतपा मे…और पढ़ेंX
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे से जानिए बेहतर पैदावार के टिप्स.हाइलाइट्सनौतपा में खेत की जुताई से खरपतवार और कीट नष्ट होते हैं.सनई-ढैंचा का प्रयोग जैविक खेती के लिए लाभदायक है.उन्नत बीज और खाद की समय पर व्यवस्था करें.बिलासपुर. खरीफ की फसल खासकर धान की अच्छी पैदावार के लिए समय रहते खेत की तैयारी, उन्नत बीजों का चयन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसी विषय पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे ने लोकल18 से विशेष बातचीत में किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए. उन्होंने बताया कि कैसे गर्मी के इस दौर—खासकर नौतपा—का लाभ उठाकर खेत की तैयारी की जा सकती है और किस प्रकार उर्वरक व बीजों का प्रबंध पहले से कर लेने से किसान समय पर नर्सरी की बुवाई कर सकते हैं. डॉ. पांडे ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सनई-ढैंचा जैसे हरित खाद के प्रयोग की भी सिफारिश की जिससे रासायनिक खाद की आवश्यकता कम होगी और जमीन की उर्वरता बनी रहेगी.
नौतपा में खेत की जुताई से होगा बड़ा फायदाडॉ. दिनेश पांडे ने बताया कि नौतपा के दौरान जब गर्मी चरम पर होती है, उस समय खेत की जुताई बेहद फायदेमंद होती है, जो किसान अब तक जुताई नहीं कर पाए हैं, वे जल्द से जल्द यह कार्य पूर्ण कर लें. गर्मी में जुताई करने से खेत में मौजूद खरपतवार, कीट-पतंगे और उनके अंडे नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल को नुकसान नहीं होगा और उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी.
जमीन की गुणवत्ता के अनुसार करें फसल का चयनडॉ. पांडे ने कहा कि किसानों को अपनी जमीन की प्रकृति पहचाननी चाहिए. यदि जमीन ऊंची है, तो वहां धान की खेती से बचें और दलहन या तिलहन की फसल लगाएं. इन फसलों को कम पानी की आवश्यकता होती है और अच्छी पैदावार भी देती हैं. वहीं, मध्यम और निचली जमीनों में किसान मध्यम और अधिक अवधि वाली धान की किस्में उगा सकते हैं.
उन्नत बीज व खाद की समय से करें व्यवस्थाखरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही किसान उन्नत किस्म के बीज और खाद की व्यवस्था कर लें. इससे नर्सरी लगाने और धान की बुवाई में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी. डॉ. पांडे ने विशेष रूप से सलाह दी कि मानसून आने से पहले यह तैयारियां पूरी हो जानी चाहिए.
जैविक खेती को बढ़ावा दें, सनई-ढैंचा का करें प्रयोगरासायनिक खाद की जरूरत को कम करने और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए डॉ. पांडे ने सनई और ढैंचा जैसे ग्रीन मैन्योर (हरित खाद) के इस्तेमाल की सिफारिश की. ग्रीष्मकालीन जुताई के दौरान इनका बीज खेतों में डालने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है. इससे लंबे समय तक अच्छी उपज ली जा सकती है.
कृषि वैज्ञानिक की अपीलअंत में डॉ. पांडे ने किसानों से अपील की कि वे समय रहते खेती की तैयारी कर लें और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें. जैविक विधियों को अपनाकर खेती को लाभदायक और पर्यावरण के अनुकूल बनाएं.
Anuj SinghAnuj Singh serves as a Content Producer for Local 18 at News18, bringing over one years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology.He has worked as…और पढ़ेंAnuj Singh serves as a Content Producer for Local 18 at News18, bringing over one years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology.He has worked as… और पढ़ेंLocation :Bilaspur,Chhattisgarhhomeagricultureधान की बंपर पैदावार चाहिए? तो नौपता के दौरान सनई-ढैंचा का करें इस्तेमाल
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