फिर बारिश में भीगेंगे मां-बेटे? हालत देखकर डीएम ने दिया था घर..पर 7 महीने बाद जो हुआ, जानकर आएगा गुस्सा!



Korba News: छत्तीसगढ़ के कोरबा की ये खबर पढ़कर आपका दिल पसीज जाएगा. एक गरीब बेटे और उसबी बूढ़ी मां की हालत को डीएम भी द्रवित हो गए. आननफानन में उन्होंने दोनों के लिए पीएम आवास योजना के तहत मकान देने का आदेश कर दिया, लेकिन चंद विभागीय अफसरों के कारण अब भी इन दोनों को टूटी झोपड़ी में ही रहना पड़ रहा है.

सोनपुरी गांव के बंधनसिंह अपनी 80 वर्षीय मां समारिन बाई के साथ जर्जर झोपड़ी में जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं. सात महीने पहले सरकारी आवास के लिए पंचायत स्तर पर कई बार आवेदन करने के बावजूद उन्हें जब कोई सहायता नहीं मिली, तब अक्टूबर 2024 में बंधनसिंह अपनी मां को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. मदद की गुहार लगाई.

डीएम ने कहा था, एक महीने में…बेटे की पीड़ा देखकर कलेक्टर अजीत वसंत ने तुरंत पीएम आवास योजना के तहत एक माह के भीतर आवास बनाने का आदेश दिया. लेकिन, सरकारी तंत्र की लापरवाही ने इस उम्मीद को तोड़ दिया. कलेक्टर के आदेश के बावजूद, अधिकारियों ने इस कार्य को गंभीरता से नहीं लिया और एक छोटा सा घर बनाने में पूरे सात महीने लगा दिए. हद तो तब हो गई जब सात महीने बाद भी आवास अधूरा है.

पुताई तो दूर प्लास्टर ही अधूराप्रधानमंत्री आवास योजना को सरकार अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित करती है. घरों पर रंगाई-पुताई करके लाभार्थियों के नाम और योजना का नाम अंकित किया जाता है. लेकिन, बंधनसिंह के इस नए आवास पर रंग-रोगन तो दूर, भीतर और बाहरी दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं किया गया है. ऐसे में, आधे-अधूरे घर में मां-बेटा कैसे रहेंगे, यह एक बड़ा सवाल है.

सीईओ ने कहा, काम हो गया!जब इस मामले में जनपद पंचायत कोरबा की सीईओ कौशाम्बी गवेल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने दावा किया कि आवास का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है. वहीं, ग्राम पंचायत सोनपुरी के सचिव श्याम सारथी ने बताया कि प्लास्टर का कुछ काम बचा है, जिसे दो-तीन दिन में पूरा कर लिया जाएगा. लेकिन, हकीकत इससे कोसों दूर है.

बारिश शुरू है, अब बढ़ेंगी मुश्किलेंबंधन सिंह, जो सात महीने पहले अपनी बूढ़ी मां को गोद में लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे, तब ‘कलयुग का श्रवण कुमार’ के नाम से चर्चा में आए थे. उनकी दयनीय स्थिति देखकर लोगों का दिल पसीज गया था. कलेक्टर अजीत वसंत की पहल के बाद बंधन और उनकी मां के मन में नई उम्मीद जगी थी. अपनी मां को पक्का आशियाना देने का बंधनसिंह का सपना पूरा होने वाला था, मगर अफसरों के इस लापरवाह रवैए ने मां-बेटे की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया. बारिश का मौसम आते ही बंधन और समारिन बाई की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.



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