अंबिकापुर- इन दिनों चिलचिलाती गर्मी में सरगुजा संभाग के पत्थलगांव क्षेत्र के रस भरे, मीठे खरबूजे और तरबूज लोगों को खूब भा रहे हैं. यही कारण है कि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि झारखंड और उड़ीसा जैसे पड़ोसी राज्यों से भी खरीदार यहां के खेतों तक पहुंच रहे हैं.
खरबूजे की मिठास बढ़ा रही किसानों की आमदनीजैसे-जैसे गर्मी तेज होती है, पत्थलगांव के खरबूजे की मिठास भी बढ़ती जाती है. किसान बताते हैं कि इन फलों की मिठास और गुणवत्ता के कारण इनकी मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, जिससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है.
धान के बाद अब नगदी फसल ने किया किसानों को मालामालखरबूजा और तरबूज अब यहां गर्मी के मौसम की प्रमुख नगदी फसल बन चुके हैं. दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान इन फलों की पैदावार में लगे हुए हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है.
राज्यों की सीमाएं लांघ रहा पत्थलगांव का स्वादछत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ से लेकर बिहार, झारखंड, बंगाल और उड़ीसा तक, पत्थलगांव के खरबूजों की डिमांड जोरों पर है. इनकी खासियत है इनका गाढ़ा स्वाद, मिठास और रस, जो इन्हें बाजार में विशिष्ट बनाता है.
‘पत्थलगांव के खरबूजे’ बनी एक ब्रांड पहचानथोक व्यापारी सुधाकर शर्मा और कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि राजधानी रायपुर में अब “पत्थलगांव के मीठे खरबूजे” के नाम से विशेष पहचान बन चुकी है. विक्रेता भी इन्हें विशेष रूप से इसी नाम से बेचते हैं, जिससे ग्राहक विश्वास के साथ इन्हें खरीदते हैं.
खेती से बदलाव की ओर किसानजशपुर जिले के कटंगतरई, तिलडेगा, दर्रापारा, जोराडोल, कुनकुरी के किसान तरबूज और खरबूजों की खेती कर गर्मियों में अपनी आमदनी को बढ़ा पा रहे हैं. किसान मानते हैं कि गर्मी के सीजन में यह फसल कम लागत में अधिक लाभ दे रही है.