मां… आज मेरा बल्ला थम गया. मैंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. जानती हो मां… बीते करीब 15 सालों के टेस्ट करियर में सबसे ज्यादा मैंने तुमको कल याद किया. वैसे तो कल (रविवार) तुम्हारा दिन था. मदर्स डे जो था. यह भी सही है कि तुम्हारे लिए किसी दिन की जरूरत नहीं मां. तुम अद्भुत हो. दुनिया की सारी मांएं अद्भूत हैं. मैं तो तुमको हर पल याद करता हूं. मां… मैंने 2011 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था. इस दौरान मैंने की बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की. ये सब तुम्हारी देन है मां. बीते करीब 15 सालों में मैंने कभी अपने दम पर इतना बड़ा फैसला नहीं लिया था. लेकिन, अब लेना पड़ा. सबको एक दिन रिटायर होना है. सो मुझे भी यह फैसला लेना पड़ा. वैसे मां मैंने ठीक ही किया. और अब कितना खेलता. देखो ना मां… बीते 15 सालों में मैंने 123 टेस्ट मैच खेले, 9230 रन बनाए, 30 शतक लगाए. इसमें सात दोहरे शतक भी शामिल है. मां… इतनी सारी उपलब्धि हासिल होने के बाद भी मुझे अंदर से अच्छा नहीं लग रहा है. मन का एक कोना कह रहा है कि चिकू तुम क्यों रिटायर हो रहे हो. तुम तो बिल्कुल फिट हो. तुम्हारे अंदर तो अभी बहुत क्रिकेट बचा हुआ है. लेकिन, एक कोना कह रहा है… नहीं चिकू… अब वो समय आ गया है जब तुमको रिटायर हो जाना चाहिए. नए लड़कों के लिए जगह खाली करना होगी.
अब तुम्ही बताओ मां. मैंने सही फैसला लिया है ना. इस दुनिया में तुमसे अच्छी सलाह मुझे और कोई नहीं दे सकता. मां मुझे 2014 का अपना ऑस्ट्रेलिया दौरा याद है. उस समय मैंने पहली बार टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली थी. मैंने एडिलेड में 141 रनों की पारी खेली. मैं उस मैच में एक जिद पर अड़ा था. हमारी टीम ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतकर दिखाया.
तुम तो जानती हो मां… मैं क्रिकेट से किस हद तक प्यार करता हूं. मां तुम्हारे और अनुष्का के अलावा इस दुनिया में अगर मुझे कोई चीज सबसे अधिक प्रिय है तो यह क्रिकेट ही है. मेरे रग-रग में क्रिकेट बसा हुआ है. लेकिन, क्या करूं मां. अब समय आ गया था. नई पीढ़ी तैयार हो गई है. अपने देश का क्रिकेट भविष्य बहुत उज्ज्वल हैं.
14 साल के बच्चे क्रिकेट की दुनिया में कमाल कर रहे हैं. तुमने तो आईपीएल में 14 साल के वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी देखी होगी. क्या अद्भुत लड़का है वह. गजब का क्रिकेट खेलता है वह. ऐसे में मां अब तुम ही बताओ मैंने सही फैसला लिया है ना?
बेशक मैं पूरी तरह फिट हूं. मेरी उम्र अभी 36 साल है. लेकिन मैंने भी तो 21 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू कर लिया था. इस देश के क्रिकेट और करोड़ों चाहने वालों ने मुझे बहुत प्यार दिया है. ये सारी चीजें तो उनका ही दिया है. लेकिन अब मैदान में उनके लिए नहीं खेलना दिल को अखरेगा तो जरूर लेकिन, मैंने फैसला कर लिया है मां.
वैसे मां एक बात और. मेरे इस फैसले से तो तुमको खुश होना चाहिए. तुमको शिकायत थी कि मेरे पास समय नहीं रहता है. तू बोतली है कि तू घर नहीं रहता. हमेशा टूर पर ही रहता है. लेकिन, अब ये शिकायत दूर हो जाएगी. हम सब बैठकर घंटों गप्पे लड़ाएंगे. अब मेरे पास समय ही समय रहेगा.
चलो अब तुमको मदर्स डे की बधाई देता हूं. खूब सारा प्यार देता हूं. तुम दुनिया की सबसे अच्छी मां हो. तुम मेरी मां हो, जिसने चिकू को इतना बड़ा आदमी बनाया है. ऐसे में मैंने सोचा कि इतना बड़ा आदमी बनाने वाली अपनी मां से ही मैं क्यों नहीं बात कर लूं. आखिर… एक न एक दिन रिटायर तो होना ही था. सो आज मैंने घोषणा कर दी. चल मां… अब खूब समय मिलेगा. वामिका, अनुष्का हम सब मिलकर मस्ती करेंगे.
(विराट कोहली में मदर्स डे पर अपनी के लिए एक पोस्ट लिखा है. उस पोस्ट को आधार बनाकर ही ये काल्पनिक चिट्ठी तैयारी की गई है. इसमें उस भावना को समझने की कोशिश की गई जब विराट अपने जीवन का इतना बड़ा फैसला ले रहे होंगे और फिर मां को याद कर रहे होंगे.)