सरगुजा के मांझी युवाओं की नशा मुक्ति पहल से गांवों में बदलाव.



सरगुजा, छत्तीसगढ़ जो कभी नशे में डूबी ज़िंदगी जी रहे थे, आज वही युवा नशा मुक्ति के झंडाबरदार बनकर सामने आ रहे हैं. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बरीमा पंचायत में मांझी समुदाय के युवाओं ने जो पहल शुरू की है, वह न केवल इस समुदाय का चेहरा बदल रही है, बल्कि गांव-गांव में चेतना की अलख जगा रही है.

महुआ शराब बनी मुसीबत, युवाओं ने थामा बदलाव का रास्तामांझी समुदाय के बीच महुआ शराब का प्रचलन वर्षों पुराना है, लेकिन इसके दुष्परिणाम अब सामने आने लगे थे. नशे में एक्सीडेंट, हत्या, आत्महत्या, तस्करी और अनगिनत टूटते परिवार यही थी गांव की हकीकत. बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब रहा था. लेकिन अब मांझी युवाओं ने कहा है – बस बहुत हुआ!

बैठकों से बनी रणनीति, हर पारा टोला में छेड़ा गया जागरूकता अभियानबरीमा, नर्मदापुर, केसरा, सरभांजा जैसे गांवों में मांझी युवाओं ने टोले-टोले में बैठकों का आयोजन किया. उन्होंने खुद जाकर लोगों को समझाया कि नशा केवल शरीर नहीं, पूरे समाज को खोखला करता है. हर वर्ग के लोगों ने इस मुहिम का समर्थन किया और धीरे-धीरे गांवों में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा.

80% तक कम हुआ नशा निर्माण, चोरी-छिपे करने वाले भी डरने लगेपहले जहां 100 में 80 लोग शराब बनाने या पीने में लगे रहते थे, अब वही आंकड़ा 5% तक सिमट चुका है. युवा पहरा देते हैं, और किसी को नशा करते पकड़ा जाता है तो समाज में उसका विरोध किया जाता है. यह बदलाव किसी सरकारी योजना से नहीं, समाज की आत्मशक्ति से आया है.

बदलते गांव, उज्जवल भविष्य की उम्मीदअब गांवों में चर्चा है कि मांझी युवाओं को नशे से नहीं, नौकरी से जोड़ा जाए. लोग शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं, पंचायतें भी सहयोग कर रही हैं. यह सिर्फ एक समुदाय की कहानी नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश को एक सीख है कि बदलाव तब आता है, जब लोग खुद जागते हैं.

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