Last Updated:May 06, 2025, 17:17 ISTछत्तीसगढ़ में मक्का की प्रो-4212 किस्म से किसानों को अच्छी उपज और बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है. वैज्ञानिक पद्धति से आर्थिक स्थिति सुधर सकती है.X
मक्के की उन्नत किस्म हाइलाइट्समक्का की उन्नत किस्म प्रो-4212 से किसानों को दोगुना फायदा हो रहा है.वैज्ञानिक पद्धति से प्रति हेक्टेयर 60-80 क्विंटल उपज मिल सकती है.मक्का का उपयोग चारा, आहार उद्योग और स्टार्च उत्पादन में होता है.रायपुर. छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए मक्का की खेती अब केवल परंपरागत फसल न होकर फायदे का सौदा बनती जा रही है. छत्तीसगढ़ में मक्का की उन्नत किस्म प्रो-4212 की खेती से किसानों को अच्छी उपज और बेहतर बाजार मूल्य मिलने लगा है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी सलाह के अनुसार बुवाई और प्रबंधन किया जाए, तो यह फसल किसानों के आर्थिक हालात में बड़ा बदलाव ला सकती है.
इस किस्म के मक्के के लिए बीज दर 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है. बीज उपचार के अंतर्गत कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम/किग्रा बीज, पी.एस.बी., एजोटोबैक्टर और जैव उर्वरक जे.एस.बी. और के.एस.बी. का उपयोग किया जाता है, जिससे फसल की जड़ें मजबूत होती है और पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है. यह इसकी सबसे बड़ी विशेषता है. पंक्ति विन्यास के अनुसार पौधों की दूरी पंक्ति से पंक्ति 75 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 20 से.मी. रखी जाती है. इससे पौधों को पर्याप्त पोषण और सूर्य प्रकाश मिलता है. यह किस्म छत्तीसगढ़ की जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है.
खाद, सिंचाई और कीट नियंत्रणमक्के की फसल के लिए 5 टन/हेक्टेयर गोबर खाद के साथ-साथ एन.पी.के. 150:60:40 किग्रा प्रति हेक्टेयर के दर पर का उपयोग किया जाता है. सिंचाई की बात करें तो 20-20 दिन के अंतराल में 4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है. अंकुरण पश्चात टेबोथ्रियन 34.4% एस.सी. का प्रयोग खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता है, जबकि कीटनाशक के रूप में क्लोरानिलिप्रोल 18.5% एस.सी. का 0.4 मिली/लीटर पानी में छिड़काव प्रभावी होता है.
बाजार में बनी रहती है मांगइंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी और जलवायु मक्का उत्पादन के लिए अनुकूल है. यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर खेती करें, तो उन्हें प्रति हेक्टेयर 60-80 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो सकती है. इसके अलावा मक्का का उपयोग चारा, आहार उद्योग और स्टार्च उत्पादन में भी किया जाता है, जिससे इसकी बाजार में मांग बनी रहती है.
छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा मक्का किसानों को बीज, खाद और कीटनाशकों पर अनुदान के साथ-साथ तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. कई जिलों में मक्का क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जहां किसानों को समूह में प्रशिक्षण और विपणन की सुविधा मिलती है. छत्तीसगढ़ में मक्का की उन्नत किस्म प्रो – 4212 के जरिए किसानों को अच्छा उत्पादन और लाभ मिल रहा है.
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