ग्राम देवादा के किसान शांति भूषण तिवारी ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जरबेरा फूल की खेती शुरू की और आज वे 5 एकड़ पॉलीहाउस में इसे उगाकर लाखों रुपये की कमाई कर चुके हैं. हालांकि, इस खूबसूरत फूल की बाजार में गिरती कीमतों ने फिलहाल चिंता जरूर बढ़ा दी है.
पॉलीहाउस में खिले रंग-बिरंगे फूलतीन साल पहले उद्यानिकी विभाग के सहयोग से शांति भूषण ने पॉलीहाउस तैयार किया और पुणे से जरबेरा के पौधे मंगाकर अपनी खेती की शुरुआत की. उनका कहना है कि एक एकड़ में करीब 25,000 पौधे लगाए जाते हैं, और ये पौधे 5 से 7 साल तक फूल देते रहते हैं.
जरबेरा के लिए लाल मिट्टी, गोबर खाद और डेढ़ फीट गहरा मंदा तैयार किया जाता है, जिससे पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है.
लागत ₹1 लाख प्रति एकड़, पहले दोगुनी कमाई… अब बाजार भाव से झटकाशुरुआत में एक फूल ₹4 में बिकता था, जिससे शांति भूषण को 50% से ज्यादा मुनाफा होता था. लेकिन मौजूदा गर्मी के सीज़न में वही फूल अब ₹0.50 पैसे में बिक रहा है, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है.
“पहले पैसे डबल हो जाते थे, लेकिन अब मार्केटिंग की दिक्कत है,” वे कहते हैं.
शादी-ब्याह, सजावट में जबरदस्त डिमांडजरबेरा फूल की लाल, पीली, सफेद सहित कई रंगों की किस्में होती हैं, जो मुख्यतः डेकोरेशन, गुलदस्ते और इवेंट्स में इस्तेमाल होती हैं. यही वजह है कि राजनांदगांव, नागपुर और आसपास के इलाकों में इसकी बड़ी मात्रा में बिक्री होती है.
पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की ओर बढ़ता किसानराजनांदगांव जिले में अब कई किसान पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती को अपनाने लगे हैं. उद्यानिकी विभाग भी किसानों को फूलों की खेती के लिए तकनीकी सहायता और जागरूकता दे रहा है.
फूलों की खेती के लिए गांवों में पॉलीहाउस बनाने का चलन बढ़ रहा है, जिससे साल भर मौसम के प्रभाव से बिना रुके उत्पादन जारी रह सके.