Last Updated:May 02, 2025, 15:44 IST108 Bodies Cremated : सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का विशेष महत्व है. जो जन्म से मृत्यु तक निभाए जाते हैं. इन्हीं में से एक है अंतिम संस्कार जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद किया जाता है. 108 शवों का दाह संस्कार का रहस्यहाइलाइट्समणिकर्णिका घाट पर रोज जलती हैं 108 चिताएं.यह घाट मोक्ष प्राप्ति का पवित्र स्थान माना जाता है.108 की संख्या को पूर्णता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.108 Bodies Cremated : वाराणसी यानी काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है. यहां हर गली, हर मंदिर और हर घाट के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर जुड़ी है. इन्हीं में से एक है मणिकर्णिका घाट. यह घाट दुनिया के सबसे पुराने घाटों में गिना जाता है और इसे अंतिम संस्कार के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है. यहां दिन रात चिताएं जलती रहती हैं. ऐसा कहा जाता है कि यहां रोज कम से कम 108 शवों का अंतिम संस्कार होता है. कभी यह संख्या 300, 400 या 600 तक पहुंच जाती है, लेकिन इससे कम कभी नहीं होती. इस रहस्य को समझने के लिए पहले इस घाट की खासियत के बारे में जानना जरूरी है. जिसके बारे में हमें बता रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
मणिकर्णिका घाट की मान्यतामान्यता है कि इस घाट पर खुद भगवान शिव और माता पार्वती आए थे. यहां माता पार्वती का कर्णफूल (कर्णिका) गिरा था, इसी वजह से इस जगह का नाम मणिकर्णिका पड़ा. लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति यहां अग्नि को समर्पित होता है, उसे मोक्ष यानी पुनर्जन्म के चक्र से छुटकारा मिल जाता है.
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108 की संख्या क्यों खास है?अब सवाल यह है कि रोज 108 शवों के जलने के पीछे क्या वजह है? ज्योतिष और धर्म से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, 108 एक बेहद खास संख्या मानी जाती है. हिंदू धर्म में 108 को पूर्णता का प्रतीक कहा गया है. जप माला में भी 108 मोती होते हैं. योग में 108 ऊर्जा केंद्र यानी नाड़ियों का जिक्र होता है. ग्रहों की दूरी और समय चक्र से भी 108 का संबंध बताया गया है.
जब कोई व्यक्ति मरता है और उसका अंतिम संस्कार इस घाट पर होता है, तो माना जाता है कि उसकी आत्मा को शांति मिलती है. 108 चिताओं के जलने का यह सिलसिला इस आध्यात्मिक ऊर्जा को संतुलित बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है. ऐसा भी कहा जाता है कि यहां कुछ ऐसी अदृश्य शक्तियां हैं जो इस संख्या को बनाए रखती हैं.
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क्या ये बस एक संयोग है?जिन लोगों का जीवन मृत्यु के करीब से गुजरता है, वे कहते हैं कि मणिकर्णिका घाट सिर्फ एक अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है. यहां रोज सैकड़ों लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं. इसके बावजूद, घाट पर एक अजीब सा सन्नाटा और शांति बनी रहती है, जैसे कोई अदृश्य शक्ति सब कुछ संभाल रही हो.
homedharmमणिकर्णिका घाट का रहस्य: रोज क्यों जलती हैं 108 चिताएं?, क्या है इसकी मान्यता?
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