Spices Farming: किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है मेथी की नई किस्म ‘आर.एम.टी.-305’, खेती करने के पहले जान लें विधि



Last Updated:May 03, 2025, 23:29 ISTSpices Farming: मेथी की नई किस्म आर. एम. टी. 305  की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीजों का उपचार कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से किया जाना चाहिए ज…और पढ़ेंX

मेथी की उन्नत किस्म हाइलाइट्समेथी की नई किस्म आर.एम.टी.-305 से अधिक उपज संभवप्रति हेक्टेयर 20-25 किलोग्राम बीज की आवश्यकताबीज उपचार से बीजजनित रोगों से मिलती है सुरक्षा रायपुर. छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी है. अब मेथी की खेती से भी वे अधिक लाभ कमा सकते हैं. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई मेथी की नई किस्म आर.एम.टी.-305 किसानों के लिए एक बेस्ट ऑप्शन बनकर उभरी है. इस किस्म की विशेषताओं और वैज्ञानिक विधि से की गई खेती के माध्यम से किसान अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं.

मेथी की नई किस्म आर. एम. टी. 305  की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीजों का उपचार कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से किया जाना चाहिए जिससे बीजजनित रोगों से सुरक्षा मिलती है. मेथी की इस किस्म को त्रिभुजाकार विन्यास में 30 x 10 से.मी. की दूरी पर बोया जाता है. यह किस्म रबी मौसम के अनुकूल है.

अच्छी उपज के लिए खेत में 10-15 टन गोबर खाद के साथ-साथ नत्रजन 150 किलो, फास्फोरस 80 किलो और पोटाश 60 किलो प्रति हेक्टेयर देना आवश्यक है. उर्वरकों को दो खुराकों में विभाजित कर फर्टिगेशन के माध्यम से ड्रिप विधि से सिंचाई के साथ दिया जाना चाहिए. प्रत्येक दो दिन के अंतराल पर 30 मिनट तक एन.पी.के. 19:19:19, 12:61:0, 13:0:45 के अनुपात से प्रयोग करना चाहिए.

बुवाई के तीन दिन बाद 75 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से आक्सी डाइअर्जिल का प्रयोग करना चाहिए, जिससे प्रारंभिक खरपतवार नियंत्रण हो सके. कीट नियंत्रण के लिए लीफ माइनर और सफेद मक्खी हेतु इमामेक्टिन 0.5 ग्राम या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1.0 मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है. रोग नियंत्रण हेतु डाउनी मिल्ड्यू, ब्लाइट रस्ट आदि के लिए कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब/माइकोब्यूटानॉल 2 ग्राम/लीटर पानी में छिड़काव करने की सलाह दी गई है.

मेथी के इस किस्म से दाने की उपज 1.4 से 1.6 टन प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है, जबकि हरी पत्ती की उपज 10-12 टन प्रति हेक्टेयर तक अनुमानित है, जो किसानों के लिए एक बड़ी आर्थिक संभावना खोलती है. मेथी की यह नई किस्म न केवल रोगों और कीटों के प्रति अधिक सहनशील है बल्कि इसकी वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर लागत कम और मुनाफा अधिक होने की संभावना है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर की यह पहल निश्चित ही छत्तीसगढ़ के किसानों को एक नई दिशा दे सकती है.
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