Difference Between Shani Mahadasha and Sade Sati Explained by Astrologer Sade Sati and Shani Mahadasha Mein Antar । शनि महादशा और साढ़े साती के बीच के क्या होता है फर्क? 90% लोग एक ही समझने की करते हैं भूल



Sade Sati and Shani Mahadasha Mein Kya Antar Hota Hai: शनि को कर्म, अनुशासन और मेहनत का ग्रह माना जाता है. इसलिए जब शनि का प्रभाव किसी की कुंडली में आता है, तो जीवन में बदलाव जरूर आता है. शनि की महादशा और साढ़े साती का उद्देश्य अलग-अलग होता है और इनका प्रभाव भी अलग-अलग नियमों के अनुसार होता है. भोपाल स्थित ज्योतिषाचार्य रवि पाराशर के अनुसार, किसी भी ग्रह की महादशा के दौरान वह ग्रह उन घरों (भावों) का असर देता है जिनसे वह जुड़ा होता है. लेकिन लोग अक्सर शनि महादशा और साढ़े साती को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि ये दोनों बिल्कुल अलग होते हैं. आइए जानते हैं दोनों में क्या अंतर है.

शनि महादशा क्या होती है?हमारे ऋषि-मुनियों ने ग्रहों की महादशाओं की अवधि पहले से तय की हुई है. ये सभी एक निश्चित क्रम में आती हैं. जब गोचर में चल रहे ग्रह उस नक्षत्र के स्वामी पर आते हैं जिसमें महादशा वाला ग्रह स्थित है, तब महादशा के प्रभाव सक्रिय हो जाते हैं. यही नियम शनि पर भी लागू होता है. शनि महादशा के दौरान, शनि उस नक्षत्र स्वामी के अनुसार फल देता है, जिसमें वह बैठा है और जिन घरों से वह जुड़ा है.

शनि महादशा विंशोत्तरी दशा प्रणाली का एक हिस्सा होती है और ये करीब 19 साल तक चलती है.शनि महादशा के अच्छे या बुरे फल इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपकी कुंडली में शनि ग्रह कितना मजबूत है. इस दौरान शनि का प्रभाव आपके पूरे जीवन पर होता है. अगर आपकी कुंडली में शनि अच्छा है, तो ये समय तरक्की, सफलता और मेहनत का फल देने वाला होता है. इस समय शनि आपको अनुशासित, जिम्मेदार और स्थिर बनाता है. यह एक ऐसा दौर होता है जिसमें आप कुछ बड़ा और मजबूत बना सकते हैं- चाहे करियर हो, रिश्ते हों या जीवन की दिशा.

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साढ़े साती क्या होती है?साढ़े साती शनि की गोचर (ट्रांजिट) की स्थिति पर आधारित होती है और ये खास तौर पर आपकी भावनाओं और मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है. ये तब शुरू होती है जब शनि आपके जन्म चंद्रमा से करीब 45 डिग्री पहले के नक्षत्र में प्रवेश करता है और तब खत्म होती है जब शनि चंद्रमा से 45 डिग्री आगे निकल जाता है.

एक और उदाहरण से समझा जाए तो– जब शनि आपके जन्म के चंद्रमा के पहले, उस पर और उसके बाद के राशियों से गुजरता है, तो इसे साढ़े साती कहते हैं. चूंकि चंद्रमा मन और भावनाओं से जुड़ा होता है, तो इस समय लोग अक्सर तनाव, अकेलापन या भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस करते हैं. ये समय आपको सज़ा देने के लिए नहीं, बल्कि अंदर से मजबूत बनाने के लिए आता है. अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा मजबूत है, तो ये समय उतना मुश्किल नहीं लगता.

शनि एक कर्म का ग्रह है, इसलिए सबसे अच्छा उपाय यही है कि आप धर्म के रास्ते पर चलें, दूसरों के साथ दयालु और सहनशील बनें और अपने विश्वास के अनुसार भगवान शिव, हनुमान जी, कृष्ण या विष्णु की पूजा करें.

महादशा और अंतर्दशा अच्छी हो सकती है?अगर शनि आपकी कुंडली में कारक ग्रह है या लग्नेश है और ठीक जगह बैठा है (अथवा कम से कम हानि नहीं दे रहा), तो शनि की महादशा और अंतर्दशा अच्छी हो सकती है.

लेकिन साढ़े साती अलग होती है. चाहे शनि बहुत अच्छा क्यों न हो, फिर भी साढ़े साती में मानसिक और शारीरिक परेशानियां आ सकती हैं.

साढ़े साती के तीन चरण होते हैं

1. पहला चरण– मानसिक तनाव, अकेलापन, चिंता जैसी परेशानियां दे सकता है.

2. दूसरा चरण – शारीरिक तकलीफें, खासतौर पर यूरिन इन्फेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, और व्यापार व पैसे के मामलों में नुकसान हो सकता है.

3. तीसरा चरण- पहले दो से कुछ बेहतर होता है. यानी निकलने का समय होता है, लेकिन कुछ परेशानियां फिर भी रह सकती हैं.

दोनों में फर्क क्या है?शनि महादशा ज़्यादा लंबे समय तक चलती है और ज़्यादातर काम, करियर और जिम्मेदारियों से जुड़ी होती है.

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शनि महादशा कर्म और मेहनत के जरिए और साढ़े साती मन और भावनाओं के जरिए हमें सिखाती है. शनि के समय भले ही चीज़ें कठिन लगें, लेकिन इसका असर लंबे समय तक टिकने वाला होता है और हमें भीतर से मजबूत बनाता है.



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