Last Updated:May 05, 2025, 20:46 ISTछत्तीसगढ़ का मंडीप खोल गुफा राजनांदगां से अलग होकर बने नए जिले खैरागढ़ छुईखदान गंड़ई में स्थित है.मण्डीप खोल गुफा को लेकर कई रियासत कालीन मान्यताएं जुड़ी हैं. दुर्गम रास्ते, घने जंगल और नदी नालों को पार कर श्रद्ध…और पढ़ेंX
रहस्यमई गुफाराजनांदगांव: छत्तीसगढ़ की धरती कई तरह के वन संपदा और अद्भुत प्राकृतिक तथ्यों को समेटे हुए है. यहां घने जंगल, गुफा और गुफा में स्थापित धाम कई वर्षों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता आया है. इसी श्रेणी में राजनांदगांव का मंडीप खोल गुफा है. जिसे हर साल अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार को खोला जाता है. इस गुफा में शिवलिंग स्थापित है जिसके दर्शन करने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं. भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु बाबा मंडीप खोल के दरबार में पहुंचते हैं.
छत्तीसगढ़ का मंडीप खोल गुफा राजनांदगां से अलग होकर बने नए जिले खैरागढ़ छुईखदान गंड़ई में स्थित है.मण्डीप खोल गुफा को लेकर कई रियासत कालीन मान्यताएं जुड़ी हैं. दुर्गम रास्ते, घने जंगल और नदी नालों को पार कर श्रद्धालु मंडीप खोल गुफा पहुंचते हैं. यहां गुफा राजनांदगांव जिले से अलग होकर बने जिला यानी खैरागढ़-छुईखदान-गंड़ई में स्थित है, मंडीप खोल गुफा को लेकर कई रियासत कालीन मान्यताएं जुड़ी है. बैगा गुणिराम और पुजारी विष्णु के अनुसार वर्षो से ठाकुरटोला के जमींदार इस गुफा को अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले सोमवार को केवल एक दिन के लिए विधिवत पूजा अर्चना कर खोलते हैं.
क्षेत्र की खुशहाली की कामनाचट्टान हटाने से जंगली जानवरों से बचाव के लिए पहले हवाई फायर भी किया जाता है, गुफा में पहला प्रवेश जमींदार परिवार के लोग ही करते हैं और वहां स्थित शिवलिंग सहित अन्य देवी देवताओं की विधि विधान से पूजा अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं. भक्तों ने मंडीप खोल गुफा में प्रवेश किया तो उन्हें शीतलता का अहसास हुआ. यह भी एक तरह का रहस्यमय किस्सा है. सकरे मुख वाली इस गुफा के अंदर अनेक बड़े कक्ष है. कुछ साल पहले पुरातत्व विभाग द्वारा इस गुफा का सर्वेक्षण किया गया था. जिसमे यह पाया गया कि यह गुफा देश की सबसे लंबी और एशिया की दूसरी सबसे लंबी गुफा है तथा इसके इतिहास में काफी रहस्य छिपे हुए हैं जिन पर अभी अनुसंधान होना बाकी है.
बाबा भोलेनाथ के दर्शन पातेभौगोलिक दृष्टिकोण से मंडीप खोल गुफा मैकल पर्वत माला के खूबसूरत हिस्से में स्थित है यहां पहुंचना सरल नही है, क्योंकि गुफा तक पहुंचने का कोई स्थाई रास्ता नहीं है, पैलीमेटा या ठाकुरटोला तक ही सड़क मार्ग मौजूद है इसके बाद श्रद्धालुओं को घोर जंगल से होते हुए पगडंडियों की सहारे आगे बढ़ते हैं. इसके अलावा उन्हें रास्ते में पड़ने वाले नदी और नालों को पार करना पड़ता है, गुफा के पास स्थित कुंड से निकलने वाली श्वेत गंगा को श्रद्धालु रास्ते में 16 बार पार करते हैं और बाबा भोलेनाथ के दर्शन पाते हैं.
एक ही नदी को 16 बार करते हैं पारमंडीप खोल गुफा को ठाकुर टोला जमींदारी के अंतर्गत आने के साथ ही परंपरागत अनुसार यहां के राजा या उनके परिवार के सदस्य ही खोलते हैं.इसके बाद देवी देवताओं का स्मरण कर पूजा अर्चना कर लोग गुफा के अंदर प्रवेश करते हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहित पर्यटक आज गुफा खुलने के बाद अंदर पहुंचे. गुफा में पहुंचने के लिए एक ही नदी को 16 बार पार करके लोग मंडीप खोल गुफा तक पहुंचते हैं.
रहस्यों से भरी है गुफाराज परिवार के सदस्यों ने बताया कि ” गुफा के अंदर कई रहस्य छिपे हुए हैं. गुफा में चमकीले पत्थर पाये जाते हैं. मीना बाजार,अजगर गुफा,चमगादड़ गुफा,श्वेत गंगा भी है.परिवार ही अक्षय तृतीया के बाद पहले सोमवार को मंडीप खोल गुफा में प्रवेश करता है.इसके बाद गुफा में विराजमान शिवलिंग की पूजा की जाती है.”
Location :Rajnandgaon,Chhattisgarhhomechhattisgarhदेश की सबसे लंबी रहस्यमयी गुफा, साल में सिर्फ एक दिन खुलती; जानें रोचक इतिहास
Source link