बिलासपुर: धरोहर के रूप में खड़ा बिलासपुर का मल्टीपरपज हायर सेकेंडरी स्कूल केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि एक सदी से अधिक पुराने गौरव, परंपरा और उत्कृष्ट शिक्षा का जीवंत प्रतीक है. 110 सालों से यह विद्यालय निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है. यह स्कूल आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तकनीकी संसाधनों के साथ आगे बढ़ाते हुए सरकारी स्कूलों की एक नई पहचान गढ़ रहा है. ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी-अंग्रेजी माध्यम विद्यालय’ के रूप में यह संस्थान न केवल छात्रों की प्रतिभा को संवार रहा है, बल्कि निजी स्कूलों को भी प्रेरणा दे रहा है.
ऐतिहासिक नींव और गौरवशाली आरंभ1914 में ‘एडवर्ड हाईस्कूल’ के नाम से मात्र 24 छात्रों के साथ शुरू हुए इस विद्यालय की नींव महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव ने सरगुजा राज्य के इंजीनियर सी.पी. वर्मा की देखरेख में रखी थी। 11 नवंबर 1946 को युवराज अंबिकेश्वर शरण सिंहदेव द्वारा इसका विधिवत उद्घाटन किया गया. 1955 में मध्यप्रदेश के गठन के पश्चात इसका नाम ‘शासकीय एडवर्ड बहु उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ रखा गया और समय के साथ इसे ‘मल्टीपरपज स्कूल’ के नाम से प्रसिद्धि मिली.
आधुनिक तकनीक से सुसज्जित शिक्षा संस्थानयह स्कूल न केवल इतिहास का साक्षी है, बल्कि तकनीकी युग का अग्रदूत भी बन चुका है. यहां अटल टिंकरिंग लैब (ATL) जैसी सुविधाएं हैं, जहां छात्रों ने ‘कृषि मित्र’ नामक यंत्र का निर्माण किया जिसे पेटेंट भी प्राप्त हुआ. स्कूल के छात्रों को नीति आयोग द्वारा स्वतंत्रता दिवस परेड में आमंत्रण मिला, और 85 देशों के समक्ष 3डी प्रिंटर प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान बनाई.
प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की जन्मस्थलीयह विद्यालय शिक्षा की उस नींव को प्रस्तुत करता है, जिसने न केवल आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक और सांसद जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व तैयार किए हैं, बल्कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अग्रणी छात्र दिए हैं. 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में इस विद्यालय के छात्रों ने ब्रिटिश झंडा हटाकर तिरंगा फहराया था, और इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
इतिहास और आधुनिकता का अद्वितीय संगमविद्यालय की ऐतिहासिक इमारत को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक तकनीकी संसाधनों से सजाया गया है. स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशालाएं और नवाचार आधारित अधिगम इसे शासकीय विद्यालयों में एक आदर्श रूप प्रदान करते हैं.
निजी स्कूलों को दे रहा कड़ी टक्करशिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थानों के बढ़ते प्रभाव के बीच मल्टीपरपज स्कूल अपनी उपलब्धियों, तकनीकी नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता के बल पर उन्हें सीधी टक्कर दे रहा है. यहां की शिक्षा प्रणाली और छात्रों की उपलब्धियां इसे एक प्रेरणादायक मॉडल बनाती हैं.
110 वर्षों का गौरवशाली सफरबिलासपुर का मल्टीपरपज हायर सेकेंडरी स्कूल केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक धरोहर है. इसके 110 वर्षों का गौरवशाली सफर यह सिद्ध करता है कि जब परंपरा, समर्पण और तकनीकी नवाचार एक साथ चलते हैं, तो शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, परिवर्तन का माध्यम बन जाती है.