परिवार में जब किसी की मृत्यु होती है तो उसका अंतिम संस्कार करने के बाद श्राद्ध किया जाता है. श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोज, पंचबलि कर्म आदि शामिल होता है. शास्त्रों के अनुसार, श्राद्ध करने से मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को तृप्ति मिलती है. यदि श्राद्ध न किया जाए तो वह अतृप्त रहती है और वह परिवार को परेशान करती है. अतृप्त आत्मा श्राप देती है, जिससे परिवार की उन्नति रुक जाती है. श्राद्ध कौन कर सकता है? महिलाएं श्राद्ध कर सकती हैं या नहीं? महिलाओं को पिंडदान का अधिकार है या नहीं? इसके बारे में शास्त्रों में बताया गया है.
श्राद्ध कौन कर सकता है?1. यदि परिवार में पिता की मृत्यु होती है तो पुत्र को ही श्राद्ध का अधिकार होता है.
2. किसी पिता के एक से अधिक बेटे हैं तो बड़े बेटे को उसका अंतिम संस्कार और श्राद्ध करने का अधिकार है.
3. बड़ा बेटा ही अंतिम क्रिया से लेकर एकादशाह और द्वादशाह तक के सभी कार्य करता है.
4. किसी कारणवश बड़ा भाई उपलब्ध नहीं है तो छोटा भाई उसकी अनुमति से पिता का श्राद्ध कर सकता है.
5. यदि आपका संयुक्त परिवार है तो पितृ पक्ष के समय में भी बड़े भाई को ही श्राद्ध करना चाहिए. यदि सभी भाई अलग-अलग रहते हैं तो पितृ पक्ष में उनको पिता का श्राद्ध अलग-अलग करना चाहिए.
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बेटा न हो तो कौन कर सकता है श्राद्ध?यदि किसी का बेटा नहीं है तो उसका श्राद्ध पौत्र, प्रपौत्र, पत्नी, भाई, बेटी का पुत्र, भतीजा, पिता, माता, बहू, बहन, भांजा या परिवार के अन्य सदस्य कर सकते हैं.
विष्णु पुराण के अनुसार, अपने परिवार या सपिंड में उत्पन्न व्यक्ति ही श्राद्ध कर सकता है. इसमें बेटा, भाई, भतीजा, पौत्र, प्रपौत्र या अन्य पुरुष शामिल है. यदि व्यक्ति के परिवार में कोई न हो तो मातृ पक्ष का कोई भी व्यक्ति श्राद्ध कर सकता है.
महिलाएं कर सकती हैं श्राद्ध और पिंडदान?शास्त्रों में महिलाओं को भी श्राद्ध और पिंडदान का अधिकार प्राप्त है, लेकिन यह तभी संभव होता है, जब पिता पक्ष में कोई पुरुष न हो. शास्त्रों के अनुसार, मातृ कुल और पितृ कुल के न होने पर महिला को श्राद्ध का अधिकार है. पिता का पिंडादान आदि सभी कर्म बेटे को ही करना चाहिए, लेकिन बेटा नहीं है तो पत्नी कर सकती है. पत्नी नहीं है तो कोई सहोदर भाई कर सकता है.
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अनाथ का श्राद्ध कैसे होगा?यदि किसी व्यक्ति को कोई नहीं है, वह अनाथ है, उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसका मित्र अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर सकता है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, राजा सभी का भाई माना जाता है, यदि किसी व्यक्ति का कोई नहीं है तो राजा को उस व्यक्ति के धन से उसका अंतिम संस्कार और अन्य कर्म करा देना चाहिए.