धान की रोपाई के पहले खेत को इस ट्रिक से तैयार करें किसान, पानी की बचत के साथ होगी बंपर पैदावर



Last Updated:May 06, 2025, 15:16 ISTछत्तीसगढ़ में धान की सीधी बुवाई (DSR) तकनीक से किसानों को कम लागत, ज्यादा उत्पादन और पानी की बचत हो रही है. इस तकनीक से पर्यावरण संरक्षण भी होता है और खरपतवार नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाते हैं.X

धान की फसलहाइलाइट्सडीएसआर तकनीक से धान की खेती में पानी की बचत होती है.इस तकनीक से प्रति एकड़ 5 क्विंटल तक अधिक उत्पादन होता है.खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमेथालिन का छिड़काव करें.राजनांदगांव– छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, और इसका कारण है यहां की धान की समृद्ध विविधता. एक समय था जब यहां 23,208 से अधिक किस्मों की धान की प्रजातियां पाई जाती थी.बदलते समय और तकनीक के अभाव में इन प्रजातियों की संख्या घटती जा रही है, लेकिन वैज्ञानिक खेती अब किसानों को एक नई दिशा दिखा रही है.

पारंपरिक खेती से आगे बढ़ें, अपनाएं डीएसआर तकनीककिसान अब पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक पद्धति यानी डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन पा सकते हैं. इस तकनीक से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है.

सीधी बुवाई से कितना होगा फायदा?सहायक संचालक कृषि डॉ. बीरेंद्र अनंत के अनुसार.

30–35% तक पानी की बचत

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी

प्रति एकड़ 5 क्विंटल तक अधिक उत्पादन

कम लागत में अधिक लाभ

कैसे करें खेत की तैयारी?गेहूं की कटाई के बाद खेत को जोतकर समतल करें.

‘पलेवा’ करें , खेत में पानी भरें और फिर दोबारा जुताई करें.

डीएसआर मशीन से बुवाई करें, प्रति एकड़ 8–10 किलोग्राम बीज का प्रयोग करें.

पंक्तियों की दूरी-9 इंच

बीज की गहराई-1.5–2 इंच

वैज्ञानिक तरीके से पाएं खरपतवार से छुटकाराधान की सीधी बुवाई के साथ खरपतवार की समस्या को भी समझदारी से निपटाना जरूरी है.

बुवाई के तुरंत बाद, प्रति एकड़ 1200–1500 मिली पेंडीमेथालिन (30% EC) को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें.

24 घंटे के अंदर छिड़काव करें, ताकि खरपतवार न पनप सके.

Location :Rajnandgaon,Rajnandgaon,Chhattisgarhhomelifestyleधान की रोपाई के पहले खेत को इस ट्रिक से तैयार करें किसान, पानी की बचत के साथ..



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