वैशाख माह का शुक्र प्रदोष 9 मई को है. मई का शुक्र प्रदोष वज्र योग, रवि योग और हस्त नक्षत्र में है. इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं. हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस बार शुक्र प्रदोष के दिन रुद्राभिषेक का सुंदर संयोग बना है. रुद्राभिषेक उस दिन ही करते हैं, जिस दिन शिव वास होता है. शिव वास के बिना रुद्राभिषेक संभव नहीं है. शिव वास में यह भी देखना महत्वपूर्ण होता है कि उस दिन शिव का वास किस स्थान पर या किसके साथ या किस अवस्था में है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं शुक्र प्रदोष पर रुद्राभिषेक मुहूर्त और दोष पूजा मुहूर्त के बारे में.
मई शुक्र प्रदोष 2025 रुद्राभिषेक का समयज्योतिषाचार्य भट्ट के अनुसार, त्रयोदशी यानि प्रदोष व्रत, चतुर्दशी यानि शिवरात्रि के दिन और सावन माह में सभी दिन शिव का वास होता है. इस वजह से इन दिनों में रुद्राभिषेक किया जाता है. इस बार मई के शुक्र प्रदोष पर शिव का वास कैलाश पर प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. उसके बाद शिव का वास उनके प्रिय वाहन नंदी पर होगा. जब शिव का वास नंदी और कैलाश पर होता है तो वह शुभ फलदायी माना जाता है. इस शिव वास में रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति का कल्याण होता है.
ये भी पढ़ें: मई का पहला प्रदोष कब है? इस व्रत में शाम को ही क्यों करते हैं शिव पूजा? पंडित जी से जानें वजह
9 मई को प्रदोष के दिन जिसे भी रुद्राभिषेक कराना है, उसके लिए पूरा दिन शुभ है. आप अपनी सुविधानुसार समय का चयन करके रुद्राभिषेक करा सकते हैं. हालांकि इसके लिए योग्य पंडित की उपलब्धता जरूरी है.
कैलाश और नंदी पर शिव वास का महत्वजिस दिन शिव का वास कैलाश पर होता है, उस दिन आप रुद्राभिषेक कराते हैं तो महादेव की कृपा से व्यक्ति को लाभ और सुख की प्राप्ति होती है. जीवन में शुभता आती है. वहीं जब शिव का वास नंदी पर होता है और उस समय आप रुद्राभिषेक कराते हैं तो आपके कार्य सफल होते हैं. जिस मनोकामाना की पूर्ति के लिए आप रुद्राभिषेक करा रहे होते हैं, वह शिव कृपा से सफल सिद्ध होता है.
रुद्राभिषेक कराने के फायदेशिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति रोग, दोष, कष्ट आदि से पीड़ित है, यदि वह रुद्राभिषेक कराता है, तो महादेव के आशीर्वाद से उसे इन चीजों से मुक्ति मिल जाती है. अकाल मृत्यु या अन्य संकटों से रक्षा के लिए भी रुद्राभिषेक कराते हैं. रुद्राभिषेक कराने से धन, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव आदि की भी प्राप्ति होती है.
रुद्राभिषेक का अर्थरुद्राभिषेक का मतलब है कि रुद्र का अभिषेक. रुद्र भगवान शिव को कहा गया है और अभिषेक का अर्थ है स्नान कराना. भगवान शिव का गंगाजल, शहद, दूध, गन्ने के रस, तुलसी की मंजरी आदि से अभिषेक कराने से अनेक प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
ये भी पढ़ें: 8 मई को मोहिनी एकादशी, पूजा के समय सुनें यह कथा, मिलेगा हजार गायों के दान का पुण्य
मई शुक्र प्रदोष 2025 मुहूर्तवैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 9 मई, शुक्रवार, दोपहर 2:56 बजे सेवैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि का समापन: 10 मई, शनिवार, शाम 5:29 बजे परशुक्र प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 07:01 बजे से लेकर रात 9:08 बजे तकरवि योग: देर रात 12:09 ए एम से अगली सुबह 05:33 ए एम तकवज्र योग: पूरे दिनहस्त नक्षत्र: सुबह से लेकर देर रात 12:09 ए एम तक, फिर चित्रा का प्रारंभ होगा.