कोरबा का चमत्कारी मंदिर, जहां भगवान शिव ने दी ग्वाले को दर्शन, 18 पीढ़ियों से जारी है सेवा



Last Updated:May 09, 2025, 14:51 ISTकोरबा जिले का कनकेश्वर महादेव मंदिर लगभग 200 साल पुराना एक ऐतिहासिक शिवालय है, जहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. यह मंदिर धार्मिक आस्था, पुरातन स्थापत्य और लोककथाओं के कारण क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक …और पढ़ेंX

Image हाइलाइट्सकनकेश्वर महादेव मंदिर 200 साल पुराना है.मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है.बैजू यादव की 18वीं पीढ़ी मंदिर की सेवा कर रही है.कोरबा- कोरबा जिले में स्थित कनकेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है. लगभग 200 वर्ष पुराने इस मंदिर की पहचान केवल उसकी प्राचीनता से नहीं, बल्कि यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग के कारण भी है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है.

जमींदार परिवार की ऐतिहासिक भेंटइस मंदिर का निर्माण कोरबा के जमींदार परिवार द्वारा कराया गया था. लगभग 50 फीट ऊंचा यह मंदिर उस समय की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसकी भव्य वास्तुकला आज भी प्राचीन शिल्प कौशल की झलक प्रस्तुत करती है.

ग्वाले बैजू यादव की रहस्यमयी कथामंदिर की स्थापना से जुड़ी एक रोचक लोककथा प्रचलित है. पुजारी पुरुषोत्तम प्रसाद यादव के अनुसार, गांव के ग्वाले बैजू यादव को भगवान शिव के दर्शन हुए थे. उन्हें शिवलिंग के होने का आभास हुआ और वहीं से यह स्थल पवित्र मंदिर में बदल गया. आज भी बैजू यादव की 18वीं पीढ़ी इस मंदिर की सेवा कर रही है.

हर वर्ष उमड़ती है आस्था की भीड़कनकेश्वर महादेव मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से भक्त दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर का शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति प्रदान करती है.

शिव भक्ति और परंपरा का जीवंत उदाहरणयह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि कोरबा की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है. कनकेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था, परंपरा और विश्वास का जीवंत उदाहरण है.
Location :Korba,Chhattisgarhhomechhattisgarhकोरबा का चमत्कारी मंदिर, जहां भगवान शिव ने दी ग्वाले को दर्शन, 18 पीढ़ियों से



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