गर्मी सीजन में कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती में बंपर मुनाफा, कृषि विशेषज्ञ से जानें सावधानियां और आमदनी का जरिया



Last Updated:May 09, 2025, 23:40 ISTडॉ. शर्मा ने सुझाव देते हुए कहा कि किसान ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए अर्ली वैरायटी यानी जल्दी तैयार होने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए. इससे वे बाजार में सबसे पहले अपनी फसल उतार सकते हैं और ऊंचे दामों का लाभ ले …और पढ़ेंX

कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेतीहाइलाइट्सकद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती से बंपर मुनाफासमय पर बुआई और रोपाई से उपज में वृद्धिअर्ली वैरायटी का चयन ऊंचे दामों का लाभ देता हैरामकुमार नायक, रायपुर –  जैसे ही ग्रीष्मकालीन मौसम दस्तक देता है, छत्तीसगढ़ के किसान अपनी परंपरागत और लाभदायक फसलों की ओर रुख करने लगते हैं. इनमें सबसे अहम भूमिका निभाती हैं कद्दूवर्गीय सब्जियां जैसे लौकी, करेला, गलका, तोरई, खीरा और ककड़ी की.  इन सब्जियों की खेती न केवल हेल्थ के लिए बेनिफिट है, बल्कि किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया भी बन सकती है.

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अनुसंधान सह संचालक डॉ. धनंजय शर्मा ने लोकल18 को बताया कि कद्दूवर्गीय सब्जियों की बुआई फरवरी की शुरुआत में करनी चाहिए और मार्च की शुरुआत तक खेतों में रोपाई पूरी कर लेनी चाहिए. यदि बुआई और रोपाई समय पर नहीं की जाती है तो उपज में गिरावट आती है और बाजार में भाव भी अपेक्षाकृत कम मिलता है. इसलिए किसानों को समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने आगे बताया कि इन फसलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सहारा देना अत्यंत आवश्यक होता है. लौकी, करेला, गलका और तोरई जैसी बेलवाली सब्जियों को खेत में फैलने के लिए बांस और तार का सहारा दिया जाना चाहिए. ऐसा न करने पर फल मिट्टी के संपर्क में आकर खराब हो सकते हैं, जिससे बाजार में उनकी कीमत गिर जाती है.

डॉ. शर्मा ने सुझाव देते हुए कहा कि किसान ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए अर्ली वैरायटी यानी जल्दी तैयार होने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए. इससे वे बाजार में सबसे पहले अपनी फसल उतार सकते हैं और ऊंचे दामों का लाभ ले सकते हैं. कुछ किसान पॉलीहाउस या पॉलीकवर तकनीक का उपयोग कर जनवरी से ही पौध तैयार कर लेते हैं और फरवरी के अंत तक रोपाई कर देते हैं. ऐसे किसान अप्रैल माह में जब सब्जियों के दाम चरम पर होते हैं, तब अपनी फसल बेचकर अधिक मुनाफा कमाते हैं. इसके अलावा, रोगों से बचाव के लिए फफूंदनाशक दवाओं का समय-समय पर छिड़काव भी जरूरी है.

साथ ही टपक सिंचाई प्रणाली अपनाने से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि उपज में भी 40 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है. चूंकि नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं, इसलिए खेत में नमी बनाए रखना जरूरी होता है. आगे कहा कि किसान केवल उन्हीं किस्मों का चयन करें जो छत्तीसगढ़ कृषि विश्वविद्यालय या प्रमाणित प्राइवेट कंपनियों द्वारा अनुशंसित हों, ताकि फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों बेहतर मिल सके. समय पर बुआई, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और रोग नियंत्रण जैसे उपाय अपनाकर किसान ग्रीष्मकालीन फसल से अच्छा लाभ कमा सकते हैं.
Location :Raipur,Raipur,Chhattisgarhhomechhattisgarhगर्मी में कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती में बंपर मुनाफा, जानें सही तरीका



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