Dhumavati Jayanti 2025 Date shubh muhurat ravi yog importance devi dhumavati ki puja ke fayde : धूमावती जयंती कब है? सातवीं महाविद्या की पूजा से दरिद्रता होगी दूर, नोट करें तारीख और मुहूर्त



देवी धूमावती 10 महाविद्याओं में से 7वीं महाविद्या हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मां धूमावती की उत्पत्ति ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इस वजह से हर साल इस तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है. इस बार धूमावती जयंती पर रवि योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है. उस दिन रवि योग निशिता मुहूर्त में बनेगा. इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर मां धूमावती की पूजा करता है, तो उनकी कृपा से दरिद्रता मिटती है, धन और वैभव की प्राप्ति होती है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि धूमावती जयंती कब है? धूमावती जयंती का मुहूर्त क्या है?

धूमावती जयंती 2025 तारीखज्योतिषाचार्य डॉ. भार्गव के अनुसार, देवी धूमावती की पूजा करने वाले व्यक्ति को केतु से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है. इस देवी के आशीर्वाद से सभी प्रकार के संकट और बाधाएं दूर होती हैं. जो अति दरिद्र है, उसे मां धूमावती की पूजा जरूर करनी चाहिए.

दृक पंचांग के आधार पर देख जाए तो धूमावती जयंती के लिए आवश्यक ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी ति​थि 2 जून सोमवार को रात 8 बजकर 34 मिनट से प्रारंभ होगी. इस अष्टमी ति​थि का समापन 3 जून दिन मंगलवार को रात 9 बजकर 56 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयाति​थि के आधार पर धूमावती जयंती 3 जून मंगलवार को मनाई जाएगी.

धूमावती जयंती 2025 मुहूर्त3 जून को धूमावती जयंती के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त 04:02 ए एम से 04:43 ए एम तक है. उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से दोपहर 12:47 पी एम तक है. लाभ-उन्नति मुहूर्त 10:35 ए एम से 12:19 पी एम और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 12:19 पी एम से 02:03 पी एम तक है. उस दिन का निशिता मुहूर्त रात 11:59 पी एम से देर रात 12:40 ए एम तक है.

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रवि योग में धूमावती जयंती 2025धूमावती जयंती पर रवि योग बन रहा है. रवि योग देर रात 12 बजकर 58 मिनट पर बनेगा और वह अगले दिन 04 जून को सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा हर्षण योग प्रात:काल से सुबह 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. फिर वज्र योग बनेगा. उस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र देर रात 12:58 ए एम तक है, फिर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है.

कौन हैं देवी धूमावती?पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी धूमावती का संबंध 10 महाविद्याओं से है. वे सातवीं महाविद्या हैं. धन, वैभव, सुख, समृद्धि के साथ दरिद्रता को दूर करने के लिए देवी धूमावती की पूजा करते हैं. तंत्र साधना में मारण और उच्चाटन के लिए देवी धूमावती की पूजा करते हैं. इनकी कृपा से केतु से संबंधित दोष और संकट मिटते हैं. जिस पर देवी धूमावती की कृपा होती है, उसे केतु परेशान नहीं करता है. शत्रुओं पर विजय के लिए भी इनकी पूजा करते हैं. रोग, दोष और कष्ट मिटते हैं.

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कैसे हुई देवी धूमावती की उत्पत्तिकथा के अनुसार, माता पार्वती और भगवान शिव कैलाश पर्वत पर भ्रमण कर रहे थे. उसी समय माता पार्वती को भूख लग गई. उन्होंने शिव जी से भोजन के लिए कहा. तो भोलेनाथ ने उनको कुछ समय प्रतीक्षा करने के लिए बोला. देखते ही देखते माता पार्वती की भूख इतनी बढ़ गई कि उन्होंने शिव जी को ही निगल गईं. शिव जी के अंदर विष का प्रभाव है, उसका असर माता पार्वती पर होने लगा, जिससे उनका शरीर धूएं के समान विकृत हो गया. माता पार्वती का यह स्वरूप देवी धूमावती के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

एक कथा यह भी है कि जब देवी सती ने अपने पिता के यज्ञ में अपने शरीर को जला दिया तो उसके धुएं से देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई. देवी धूमावती कुमारी हैं. युद्ध में उनको कोई हरा नहीं सका, इसलिए उन्होंने विवाह नहीं किया. उनके विवाह की शर्त थी कि जो युद्ध में उनको परास्त करेगा, उससे ही विवाह करेंगी.



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