अंबिकापुर- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के सरगवा गांव में एक ऐसा परिवार है जो पीढ़ियों से जंगली जड़ी-बूटियों से वैदिक उपचार करता आ रहा है. इस परिवार की खास बात यह है कि ये लोग आज भी जंगलों से ताजा औषधीय पौधे इकट्ठा कर लोगों का इलाज करते हैं. इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं वैद कृष्ण कन्हैया मिश्रा, जिन्होंने न केवल पारंपरिक चिकित्सा को जीवित रखा है, बल्कि इसे आधुनिक स्वरूप में भी ढाल दिया है.
बचपन से ही रहा वैदिक ज्ञान से लगावकृष्ण कन्हैया मिश्रा का बचपन से ही जड़ी-बूटियों के प्रति गहरा जुड़ाव रहा. वे जंगलों में घूमकर औषधीय पौधे इकट्ठा करते और उनके गुणों को समझते थे. यही वजह है कि उन्होंने “बजरंग कुटिर” नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है, जहां ताजा और प्रभावशाली जड़ी-बूटियां मिलती हैं.
ताजगी ही है असली औषधि की पहचानबजरंग कुटिर की सबसे बड़ी खासियत है यहां मिलने वाली ताजा जड़ी-बूटियां. मिश्रा बताते हैं कि ताजगी से जड़ी-बूटी का असर कई गुना बढ़ जाता है. इनकी जड़ी-बूटियां पेट दर्द, गैस, पीलिया, अल्सर, बवासीर जैसे रोगों में असरदार मानी जाती हैं.
लीवर का प्राकृतिक टॉनिककृष्ण मिश्रा बताते हैं कि चिरायता लीवर के लिए बेहद लाभकारी होता है. यह न केवल लीवर को स्वस्थ रखता है, बल्कि पाचन को भी दुरुस्त करता है. साथ ही बुखार, त्वचा रोग और रक्त की शुद्धता में भी रामबाण है.
सतावर महिलाओं के लिए वरदानबजरंग कुटिर में मिलने वाली ताजा सतावर महिलाओं की कमजोरी दूर करने, पाचन को सुधारने और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है. मिश्रा का मानना है कि सुखी सतावर की तुलना में ताजा सतावर अधिक असरदार होती है.
जड़ी-बूटियों से कमाई और समाज में पहचानबजरंग कुटिर के जरिए कृष्ण मिश्रा न केवल लोगों को स्वास्थ्य लाभ दे रहे हैं, बल्कि इससे उनकी दैनिक आय और सामाजिक पहचान भी बढ़ी है. दूर-दराज से लोग इनके पास जड़ी-बूटी लेने आते हैं.
आधुनिक युग में भी जीवित है पारंपरिक ज्ञानजहां आधुनिक चिकित्सा में ताजगी की जगह पैकेजिंग ने ले ली है, वहीं अम्बिकापुर के सरगवा में बजरंग कुटिर आज भी जंगल से सीधे ताजा औषधियां लाकर लोगों को राहत पहुंचा रहा है. यह न केवल परंपरा का सम्मान है, बल्कि एक कारगर इलाज भी है.