Last Updated:May 12, 2025, 15:18 ISTराजनांदगांव में जल संकट के चलते महिलाओं ने ‘नीर और नारी जल यात्रा’ शुरू की है. इस पहल के जरिए वे गांव-गांव जाकर जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं, जिसमें पद्मश्री फूलबासन बाई यादव भी शामिल हैं.X
जल यात्राहाइलाइट्सराजनांदगांव में जल संकट के चलते महिलाओं ने ‘नीर और नारी जल यात्रा’ शुरू की.600 से अधिक हैंडपंप सूख चुके हैं, जिससे पेयजल की किल्लत बढ़ी.पद्मश्री फूलबासन बाई यादव इस अभियान की प्रेरणा बनीं.राजनांदगांव- राजनांदगांव जिले सहित पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी के कारण जल संकट गहराता जा रहा है. नदियां-नाले सूख चुके हैं, भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है. जिले के तीन ब्लॉक “सेमी क्रिटिकल जोन” घोषित किए गए हैं. 600 से अधिक हैंडपंप सूख चुके हैं, जिससे पेयजल की किल्लत हर गांव तक पहुंच चुकी है.
ग्रामीण इलाकों में पानी का हाहाकारबढ़ते जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने बोर खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है. कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं. संकट की इस घड़ी में महिलाओं ने मोर्चा संभाला है और ‘नीर और नारी जल यात्रा’ के माध्यम से जनजागरूकता का संदेश दे रही हैं.
हरियाली बहिनी और महिला समूहों की अनोखी पहल‘हरियाली बहिनी’ समूह के नेतृत्व में महिलाएं ‘नीर और नारी जल यात्रा’ निकाल रही हैं. इस यात्रा का उद्देश्य है ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाना. अब तक 50 से अधिक गांवों में यह यात्रा निकाली जा चुकी है. इसमें महिला समूहों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
पद्मश्री फूलबासन बाई यादव बनीं अभियान की प्रेरणाइस अभियान में पद्मश्री फूलबासन बाई यादव की विशेष भूमिका है. उन्होंने कहा, “नीर को नारी ही बचा सकती है. सुबह से शाम तक पानी की जरूरत महिलाओं को ही सबसे ज्यादा पड़ती है, इसलिए इस जिम्मेदारी को महिलाओं ने खुद उठाया है. जल नहीं तो कल नहीं.”
नुक्कड़ नाटक, कलश यात्रा और सामूहिक संदेशनीर और नारी जल यात्रा के दौरान महिलाओं द्वारा नुक्कड़ नाटक, कलश यात्रा, और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है. इस पहल का मकसद है जल के सीमित और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए समाज को प्रेरित करना है.
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