Jyeshtha Month 2025 birth of shanidev these 5 Tips for Benefits from Astrologer rishikant mishra | आज से ज्येष्ठ मास शुरू, शनिदेव के जन्म से भी है संबंध, जानें किन उपायों से होगा लाभ



Jyeshtha Month 2025 Upay: हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा के समापन के बाद आज से पावन पवित्र ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो चुकी है. ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा तिथि को ज्येष्ठ माह का पहला दिन होता है. हालांकि, गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार 27 मई 2025 से यह मास प्रारंभ होगा. विष्णु पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु के अवतार भगवान त्रिविक्रम की पूजा करते हैं. इस माह को न्याय के देवता शनिदेव से जोड़कर भी देखा जाता है. मान्यता है कि, ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है.

शास्त्रों के अनुसार शनि देव जी का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रात के समय हुआ था. इसलिए इस मास का महत्व और बढ़ जाता है. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो इस माह कुछ उपाय अधिक फलदायी माने जाते हैं. अब सवाल है कि आखिर ज्येष्ठ माह कौन से उपाय करना चाहिए? ज्येष्ठ माह में किन उपायों से होगा लाभ? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

ज्येष्ठ माह का प्रारंभ 2025

दृक पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 12 मई दिन सोमवार को रात 10 बजकर 25 मिनट से शुरू हुआ. इस तिथि का समापन 13 मई दिन मंगलवार को देर रात 12 बजकर 35 मिनट पर होगा. उदयाति​थि के आधार पर ज्येष्ठ माह का शुभारंभ 13 मई से है. उस दिन ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा होगी.

ज्येष्ठ मास में इन उपायों से होगा लाभ

एक समय भोजन करें: महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार, “ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्. ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते..” यानी जो एक समय ही भोजन करके ज्येष्ठ मास को बिताता है वह स्त्री या पुरुष, अनुपम श्रेष्ठ एश्‍वर्य को प्राप्त होता है.

तिल का दान करें: शिवपुराण के अनुसार ज्येष्ठ में तिल का दान बलवर्धक और मृत्युनिवारक होता है. वहीं, धर्मसिन्धु के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को तिलों के दान से अश्वमेध यज्ञ का फल होता है.

श्री नारद पुराण श्रवण करें: ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन मूल नक्षत्र होने पर मथुरा में स्नान करके विधिवत् व्रत-उपवास करके भगवान कृष्ण की पूजा उपासना करते हुए श्री नारद पुराण का श्रवण करें तो भक्ति जन्म-जन्मान्तरों के पाप से मुक्त हो जाता है.

भगवान विष्णु की पूजा करें: माया के जाल से मुक्त होकर निरंजन हो जाता है. भगवान विष्णु के चरणों में वृत्ति रखने वाला संसार के प्रति अनासक्त होकर फलस्वरूप जीव मुक्ति को प्राप्त करता हुआ वैकुंठ वासी हो जाता है.

भगवान त्रिविक्रम की पूजा करें: महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 109 के अनुसार ज्येष्ठ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके जो भगवान त्रिविक्रम की पूजा करता है, वह गोमेध यज्ञ का फल पाता और अप्सराओं के साथ आनन्द भोगता है .



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