चार धाम यात्रा जा रहे हैं तो वहां से जरूर लेकर आएं ये 4 चीजें, बैकुंठ धाम के खुलेंगे द्वार



उत्तराखंड के पहाड़ों में स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को छोटा चारधाम कहा जाता है. वहीं बद्रीनाथ, रामेश्वरम, द्वारकाधीश और जगन्नाथ पुरी को मुख्य चार धाम कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति चार धाम की यात्रा करता है, वह जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह चार दिव्य स्थान बेहद पवित्र माने जाते हैं और यह यात्रा भारतीय संस्कृति के साथ धर्म के मूल्यों को भी दर्शाती है. अगर आप भी चार धाम यात्रा पर जा रहे हैं तो हर धाम में से एक एक चीज ऐसी है, जिनको जरूर लाना चाहिए.

चारधाम यात्रा का महत्वबद्रीनाथ, रामेश्वरम, द्वारकाधीश और जगन्नाथ पुरी को चार धाम यात्रा कहा जाता है और इन मंदिरों को 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने एक सूत्र में पिरोया था. आदि शंकराचार्य ने इन चार धामों की स्थापना की थी और इन्हें हिंदू धर्म के चार प्रमुख मंदिरों के रूप में स्थापित किया था. इन चार धामों में से बद्रीनाथ, द्वारका और पुरी भगवान विष्णु के मंदिर हैं, जबकि रामेश्वरम भगवान शिव को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चार धाम यात्रा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पाप धुल जाते हैं.

बद्रीनाथ धामउत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां बद्रीनाथ स्वरूप में भगवान दर्शन देते हैं. चारधाम यात्रा में से पहला धाम बद्रीनाथ है, यहां से आप वैजयंती माला या तुलसी लेकर आनी चाहिए. यह धाम सतयुग का प्रतीक माना जाता है और इस धाम का बैकुंठ भी कहा जाता है.बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के तट पर, नर और नारायण पर्वतों के बीच स्थित है.

रामेश्वर धामरामेश्वर धाम को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और इसका उल्लेख रामायाण काल से मिलता है. इस शिवलिंग की स्थापना भगवान राम ने की थी और लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए पूजा अर्चना की थी. रामेश्वर धाम को भगवान राम और भगवान शिव दोनों से जुड़ा हुआ माना जाता है. मान्यता है कि यहां के शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने मात्र से ब्रह्म हत्या जैसे पाप कर्म से मुक्ति मिलती है. चारधाम यात्रा में दूसरा धाम रामेश्वर माना जाता है, यहां से आपको पवित्र जल लेकर आना चाहिए. यह धाम त्रेतायुग का प्रतीक माना जाता है.

द्वारकाधीश धामचार धाम में से द्वारकाधीश धाम तीसरा धाम है. द्वारकाधीश धाम को जगत मंदिर भी कहा जाता है. भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर गुजरात में स्थित है और वैष्णव भक्तों के लिए विशेष महत्वपूर्ण है. द्वापर युग में भगवान कृष्ण का यही निवास स्थल था, जिसे हरि गृह के नाम से भी जाना जाता है. चारधाम के अलावा द्वारकाधीश धाम को सप्तपुरियों में से एक माना जाता है. यहां से आप गोपी चंदन और मोरपंख लेकर आना चाहिए और यह धाम द्वापर युग का प्रतीक है.

जगन्नाथ पुरी धामओडिशा में पुरी में स्थित जगन्नाथ पुरी धाम चौथा धाम माना जाता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु अपने धामों की यात्रा करते हैं तब बद्रीनाथ धाम में स्नान, द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं, पुरी में भोजन करते हैं और रामेश्वर में विश्राम करते हैं. द्वापर युग के बाद भगवान कृष्ण अपने भाई-बहन बलराम और सुभद्राजी के साथ जगन्नाथ पुरी में विश्राम करते हैं. जगन्नाथ पुरी धाम कई रहस्य और चमत्कारों से भरा पड़ा है. यहां से नारियल की छड़ी घर लेकर आना बेहद शुभ माना जाता है.



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