हिंदू धर्म ग्रंथों में दान का बड़ा महत्व है. दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जिस पात्र व्यक्ति को वह दान मिलता है, उसका कल्याण हो जाता है. व्रत, पर्व और त्योहारों पर दान के बारे मे बताया गया है. इसके अलावा मृत्य के समय यानि जब व्यक्ति के प्राण निकल रहे हों या निकलने वाले हों तो उस समय किया गया दान बहुत ही फलदायी माना जाता है. उस समय के 10 महादान बताए गए हैं.
गया में श्राद्ध से भी बढ़कर है ये दान
काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट बताते हैं कि मृत्यु के समय किया गया दान गया में किए गए श्राद्ध कर्म से भी बढ़कर फलदायी होता है. इस दान से अश्वमेध यज्ञ कराने के समान ही पुण्य फल प्राप्त होता है. जो व्यक्ति यह दान नहीं करता है, उसे मृत्यु के बाद आत्मा को रास्ते में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है. शास्त्रों में मृत्यु के समय के 10 महादान के बारे में बताया गया है. मरणासन्न व्यक्ति यह दान नहीं कर सकता है तो उसके पुत्र या उत्तराधिकारी को यह दान करना चाहिए.
मृत्यु के समय के 10 महादान
1. गाय: उस गाय का दान करना है, जिसका बछड़ा साथ में हो. इसके देवता रुद्र हैं.
2. सोना: सोने के बने आभूषण, सिक्का आदि का दान कर सकते हैं. इसके देवता अग्नि हैं.
3. चांदी: महादान में आप चांदी के सिक्के, आभूषण, प्लेट, कटोरी, गिलास आदि दान कर सकते हैं. चांदी के देवता चंद्रमा माने जाते हैं.
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4. भूमि: यदि आप क्षमतावान हैं तो भूमि का दान कर सकते हैं. भूमि के देवता भगवान विष्णु हैं.
5. तिल: तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु से हुई है. आप तिल का दान करके पुण्य कमा सकते हैं. तिल के देवता प्रजापति हैं.
6. घी: गाय के घी का दान भी 10 महादान में शामिल है. इसके देवता मृत्युंजय हैं.
7. कपड़े: मृत्यु के अंतिम समय में वस्त्रों का दान करने से पुण्य मिलता है. वस्त्रों के देवता देव गुरु बृहस्पति हैं.
8. लवण: लवण का अर्थ है नमक. इसके देवता सोम हैं.
9. धान्य: धान्य में आप चावल, जौ, गेहूं आदि का दान कर सकते हैं. धान्य के देवता प्रजापित हैं.
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10. गुड़: गुड़ के देवता भी सोम हैं.
10 के अलावा 8 महादान का भी जिक्र
शास्त्रों में 8 महादान का भी वर्णन मिलता है. 8 महादान में तिल, लोहा, सोना, कपास, लवण, सप्तधान्य, भूमि और गाय शामिल हैं. लोहा के देवता महाभैरव और कपास के देवता वनस्पति हैं. बाकी के देवताओं के बारे में ऊपर दिया गया है.