मटर की इस किस्म से खेती बनी फायदेमंद, छत्तीसगढ़ के किसान ले रहे bumper मुनाफा, जानें तकनीक



Last Updated:May 15, 2025, 12:50 ISTPea Farming: छत्तीसगढ़ के किसान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा अनुशंसित ‘इगल गोल्ड (GC-10)’ मटर की उन्नत किस्म से रबी सीजन में बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी प्राप्त कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ के किसान अब रबी सीजन में मटर की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. खासतौर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा अनुशंसित उन्नत किस्म ‘इगल गोल्ड (GC-10)’ ने किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी का रास्ता दिखाया है. इस किस्म की मटर की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 75-80 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. बीजों को 2.0 ग्राम/किलोग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना जरूरी है. पौधों को त्रिभुजाकार विधि से रोपा जाता है, जिसमें कतारों के बीच 90 सेमी और पौधों के बीच 60 सेमी की दूरी रखी जाती है. पॉलीहाउस तकनीक की मदद से किसान वर्ष भर इसकी खेती कर सकते हैं. खेत की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक है.1) 15-20 टन गोबर खाद2) 40 किलो नत्रजन, 50 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर.3) ड्रिप सिंचाई प्रणाली को सबसे बेहतर माना गया है. हर दो दिन में 30 मिनट तक पोषक जल देने की सिफारिश की जाती है. इसके साथ ही फर्टिगेशन के ज़रिए NPK (19:19:19, 12:61:0, 13:0:45) अनुपात में 2 किग्रा/हेक्टेयर की डोज दी जाती है. खरपतवार नियंत्रण के लिए हैंड वीडिंग तकनीक अपनाई जाती है.1) पहली बार 20 दिन और दूसरी बार 35 दिन के बाद.2) कीट नियंत्रण के लिए लीफ माइनर से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्सजाम की 0.35-0.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव. रोग नियंत्रण के लिए केल्सीनियम या पेनकोनाजोल का 1 मि.ली. मात्रा 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस उन्नत तकनीक को अपनाकर प्रति हेक्टेयर 12-14 टन हरी मटर की उपज प्राप्त की जा सकती है. हरी मटर की बाजार में बढ़ती मांग किसानों को अच्छा लाभ दिला रही है. यह पारंपरिक खेती की तुलना में कम लागत और अधिक आमदनी का बेहतर विकल्प बन गया है. छत्तीसगढ़ के किसान यदि इस वैज्ञानिक विधि और उन्नत बीज किस्म को अपनाते हैं, तो वे न सिर्फ उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी को भी दोगुना करने की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं.homeagricultureकम लागत, ज्यादा मुनाफा, छत्तीसगढ़ के किसानों की आमदनी डबल, जानें तरीका



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