Shani Jayanti Par Kya Na Kare 2025 Leave these 8 things immediately otherwise you will be punished by lord shani dev : मंगलवार को शनि जयंती, जल्द छोड़ दें ये 8 काम, नहीं तो शनि की वक्र दृष्टि का होंगे शिकार



सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या को हुआ था, इसलिए हर साल इस तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है. इस साल की शनि जयंती 27 मई दिन मंगलवार को है. भगवान शिव की कठोर तपस्या करके शनि देव को नक्षत्र मंडल में स्थान मिला, वे महत्वपूर्ण ग्रह बने और शिव कृपा से न्याय के देवता कहलाए. हर व्यक्ति के जीवन में शनि का प्रभाव पड़ता है. शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से कोई बच नहीं सकता. इस समय में शनि देव उस व्यक्ति को उसके किए गए कर्मों का फल देते हैं. जो गलत करता है, उसे दंडित करके सुधारते हैं और जो अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें आशीर्वाद देते हैं. शनि देव की वक्र दृष्टि से बचने के लिए 8 काम नहीं करने चाहिए.

शनि की वक्र दृष्टि से बचने के ​लिए क्या न करें

काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट कहते हैं कि शनि देव का जन्म हुआ तो उनके रंग और रूप को देखकर उनके पिता सूर्य देव पत्नी छाया के चरित्र पर संदेह करने लगे. जब मां के इस अपमान का पता शनि देव को चला तो उन्होंने अपने पिता को दंडित किया. तब से पिता और पुत्र में नहीं बनती है. शनि देव दुष्टों को हमेशा दंड देते हैं. शनि जयंती के दिन ऐसे लोगों को संभलकर रहना चाहिए.

1. जो लोग अपनी माता, पत्नी, बहन या अन्य महिला का अपमान करते हैं, उनका अनादर करते हैं, ऐसे लोगों को शनि की कुदृष्टि से कोई नहीं बचा सकता. शनि देव ने जब अपने पिता को दंडित करने से नहीं छोड़ा तो फिर वे किसे छोड़ेंगे.

2. गरीब, लाचार और असहाय लोगों को प्रताड़ित करने वाले व्यक्ति पर भी शनि देव खुश नहीं होते हैं. जब उस व्यक्ति के जीवन में शनि की दशा आती है, तो फिर उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है. शनि की मार उस पर पड़ती है.

3. जो व्यक्ति अपने घर में बड़े-बुजुर्गों को मारता है, उनके साथ बुरा बर्ताव करता है, उनका तिरस्कार करता है, अनेकों प्रकार के कष्ट देता है, उसे भी शनि देव के दंड से बचाना नामुमकिन है.

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4. यदि कोई रोगी है और शरीर से लाचार है, उसकी सेवा नहीं हो रही है. आप सामर्थ्यवान होने के बाद भी उसे कोई मदद नहीं करते हैं तो यह गलत है. ऐसा न करें, आप से जो बन पड़े, उसके लिए करें.

5. जो लोग शराब, जुआ, चोरी, हत्या या अन्य तामसिक प्रवृत्ति में फंसे हुए हैं, उनको भी शनि देव का प्रकोप सहन करना पड़ता है. उनको भी अनेक प्रकार के कष्ट होते हैं.

6. जो व्यक्ति किसी के प्रति द्वेष और ईर्ष्या की भावना रखता है, उससे घृणा करता है. कर्म और वचन से दूसरों को कष्ट देता है. दूसरों के साथ अन्याय करता है, उसके हक को मारता है, ऐसे लोगों पर भी शनि देव नाराज रहते हैं. साढ़ेसाती और ढैय्या के समय उनको किए गए कर्मों का फल भोगना पड़ता है.

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7. शनि एक न्याय प्रिय ग्रह हैं. पशु, पक्षियों या अन्य जीवों को कष्ट देने वाला व्यक्ति भी शनि से दंडित होता है.

8. जो व्यक्ति व्यभिचारी है. महिलाओं के प्रति गलत सोच रखता है, उनका शोषण करता है, ऐसे लोगों का अपराध शनि की दृष्टि में अक्षम्य है.



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