अगर आप सोचते हैं कि स्वादिष्ट आम सिर्फ कार्बाइड और केमिकल से पकते हैं, तो बिलासपुर का ठाकुर बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कोनी आपकी सोच को बदल सकता है. यहां के 67 से अधिक देशी और विदेशी किस्मों के आम, बिना किसी रसायन के प्राकृतिक रूप से पकते हैं और इनका स्वाद सेहत से भरपूर होता है.
यह महाविद्यालय आज छत्तीसगढ़ में आम की सबसे अधिक किस्मों का संरक्षण और संवर्धन करने वाला इकलौता संस्थान बन चुका है. यहां पर रिसर्च, नर्सरी विकास और सीधे आमजनों को शुद्ध आम उपलब्ध कराने जैसे कार्य एक साथ किए जा रहे हैं.
67 किस्मों का समृद्ध संग्रहस्वाद, रंग और विज्ञान का संगमउद्यानिकी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.के. वर्मा के अनुसार, इस समय महाविद्यालय के बगीचे में हाफूस (अल्फांसो), दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सिंदूरी, केसर, आम्रपाली, मलगोवा, एपल, सोनपरी, वनराज, राजापुरी, बदामी, पायरी, गिरिराज और जहाँगीर पसंद जैसी दुर्लभ और लोकप्रिय किस्में शामिल हैं.
इन सभी किस्मों को प्राकृतिक रूप से, बिना किसी कार्बाइड या रसायन के पकाया जाता है, जिससे न केवल उनका स्वाद बेहतर होता है, बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित होते हैं.
बिना केमिकल के पके फलसीधे खेत से आमजन की थाली मेंइस अनूठी पहल का संचालन कर रहे सूर्या पटले बताते हैं कि आम पूरी तरह पकने के बाद कॉलेज परिसर से ही आम जनता को बाजार दर पर बेचे जाते हैं. कोई भी व्यक्ति कॉलेज गेट से जानकारी लेकर बगीचे तक पहुंच सकता है और वहां से सीधे ताज़े आम खरीद सकता है.
यदि कोई व्यक्ति 15 किलो या उससे अधिक आम खरीदना चाहता है, तो वह पहले मोबाइल नंबर 9303492472 पर संपर्क कर अपनी डिमांड दर्ज करा सकता है. जरूरत पड़ने पर होम डिलीवरी की सुविधा भी दी जाती है.
नई किस्मों पर शोध15 साल में बनती है एक उत्कृष्ट प्रजातिप्रोफेसर डॉ. संजय वर्मा बताते हैं कि यहां सिर्फ आम की किस्में नहीं उगाई जातीं, बल्कि छात्रों को नई प्रजातियां विकसित करने की विधियां भी सिखाई जाती हैं. इसके लिए क्रॉस-पोलन तकनीक से किस्में तैयार की जाती हैं.
हर एक उत्तम प्रजाति को बाजार तक पहुंचने में लगभग 15 वर्ष का समय लगता है. संस्थान में हर किस्म का जर्मप्लाज्म संरक्षित किया गया है और इन पर सतत शोध कार्य जारी है.
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान, बना प्रदेश का गौरवहाल ही में रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम प्रदर्शनी में महाविद्यालय को उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया. यह संस्थान अब छत्तीसगढ़ का अग्रणी आम अनुसंधान केंद्र बन चुका है, जहाँ न केवल आम की खेती होती है, बल्कि किसानों के लिए नर्सरी और प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध है.
अनोखा मॉडलसाइंटिस्ट अजीत विलियम्स कहते हैं कि यह प्रदेश का एकमात्र कृषि कॉलेज है जहाँ 67 से अधिक किस्मों का जीवंत संग्रह है, रिसर्च होती है और आम नागरिकों को सीधे आम बेचे जाते हैं. यही नहीं, किसानों को सभी किस्मों के पौधे भी बिक्री हेतु उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वो अपने खेतों में नई किस्मों की शुरुआत कर सकें.
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