Hindu Temple Visit Rules: What to Do and Avoid in Mandir | मंदिर में कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलतियां, इन नियमों का करना होता है पालन



Rules of Temple Visit in Hinduism: मंदिर जाना न केवल एक धार्मिक या आध्यात्मिक कार्य है, बल्कि इसके कई मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक लाभ भी हैं. मंदिर का शांत और पवित्र वातावरण मन को स्थिर करता है और वहां की घंटियों की ध्वनि, मंत्रोच्चार और आरती की लय से मानसिक तनाव भी कम होता है. इसलिए मंदिर ना केवल पूजा स्थल हैं, बल्कि शांति और आध्यात्मिकता के केंद्र भी हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मंदिरों को देवी देवताओं का निवास स्थान माना गया है इसलिए शास्त्रों में मंदिर में ईश्वर के दर्शन करने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. आइए जानते हैं मंदिर में जाने के विशेष नियमों के बारे में…

जूते बाहर ही छोड़ेंमंदिरों में प्रवेश से पहले जूते उतारने की परंपरा है. यह न केवल स्वच्छता का प्रतीक है, बल्कि यह श्रद्धा और विनम्रता का भी संकेत है. अधिकांश मंदिरों के बाहर जूते रखने के लिए विशेष स्थान होते हैं, जहां आप उन्हें सुरक्षित रूप से रख सकते हैं. साथ ही हिंदू धर्म में गाय को पवित्र माना जाता है, इसलिए कई मंदिरों में चमड़े से बने सामान जैसे बेल्ट, बटुए और बैग्स का उपयोग प्रतिबंधित होता है.

मोबाइल ले जाने से बचेंमंदिरों में आमतौर पर नो फोटोग्राफी की नीति होती है इसलिए आप कैमरा या फोन रखने से भी बचें. ऐसा करने से ईश्वर के दर्शन और ध्यान करने में कोई विघ्न ना आए. अगर आप फोन लेकर जा रहे हैं तो मोबाइल फोन को साइलेंट मोड में रखें और अनावश्यक कॉल्स या गेम्स से बचें, ताकि अन्य भक्तों की पूजा में विघ्न न आए.

स्वच्छ वस्त्र पहनेंमंदिरों में प्रवेश करते समय साफ कपड़े पहनना आवश्यक है. कुछ मंदिरों में विशिष्ट वेशभूषा का नियम भी हैं, अगर आप इन मंदिरों में जा रहे हैं तो इन नियमों का अवश्य पालन करें. महिलाओं के लिए कंधे और घुटने ढके हुए होने चाहिए, जबकि पुरुषों को भी शॉर्ट्स से बचना चाहिए. कुछ मंदिरों में सिर ढकने की भी आवश्यकता होती है, जैसे कि गुरुद्वारों में.

स्वच्छता का ध्यान रखेंकुछ भक्त मंदिर में प्रवेश से पहले स्नान करते हैं, जो स्वच्छता और मानसिक शुद्धता का प्रतीक है. हालांकि यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन अगर आप मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं, तो हाथ धोना और स्वच्छ रहना अच्छा होता है. इससे मन में पवित्रता का भाव रहता है और ईश्वर के दर्शन व ध्यान करने में मन भी लगता है.

ईश्वर की परिक्रमा करेंमंदिरों के बाहर फूल, मिठाई और अगरबत्तियां बेचने वाले विक्रेता होते हैं. आप इन्हें भगवान को अर्पित करने के लिए खरीद सकते हैं. यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन ईश्वर को कुछ ना कुछ अर्पित करने के लिए लोग लेते हैं. आप चाहें तो एक मात्र फूल भी ले सकते हैं क्योंकि भाव को देखता है ना कि आपने क्या अर्पित किया और क्या नहीं. मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर दाहिनी दिशा में चलकर प्रदक्षिणा करना एक सामान्य प्रथा है. यह ध्यान और श्रद्धा का संकेत है.

ध्यान और शांति बनाए रखेंपुजारी और मंदिर के कर्मचारी मंदिर की पवित्रता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उनसे विनम्रता से बात करें और उनके निर्देशों का पालन करें. अधिकांश मंदिर दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बंद रहते हैं, इसलिए इन घंटों के दौरान प्रवेश प्रतिबंधित होता है. मंदिरों में शांति और ध्यान बनाए रखना आवश्यक है. जोर से बात करना, हंसी-मजाक या फोन पर बात करना मंदिर की पवित्रता को भंग कर सकता है.

पूजा विधि का पालनमंदिर में क्या हो रहा है, यह देखें और समझें. विभिन्न लोग एक ही देवता की पूजा विभिन्न तरीकों से करते हैं. अगर आप कुछ अलग देख रहे हैं, तो उसका सम्मान करें क्योंकि ईश्वर केवल भाव देखता है. इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन किस तरह पूजा कर रहा है. मंदिर की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में करें, कभी भी वामावर्त नहीं. दान देने के लिए हंडी (दानपेटी) या आरती थाली का उपयोग करें. यह मंदिर के निर्माण, सौंदर्यीकरण और तीर्थयात्रियों की सेवा में उपयोग होता है.

देवी देवताओं को छूने से बचेंसाथ ही जो लोग मंदिर जाते हैं, उन्हें उस दिन मांसाहारी भोजन (अंडे सहित) से बचना चाहिए. इसका उद्देश्य आत्मा को शुद्ध रखना है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, देवता में प्राण शक्ति (जीवन शक्ति) होती है. इसलिए, केवल पुजारी को ही देवी देवताओं को छूने की अनुमति होती है अन्यथा, देवता को छूना अवमानना मानी जाती है. प्रसाद (प्रसादम) वह मुफ्त भोजन है जो पूजा के बाद भक्तों को दिया जाता है. इसे ग्रहण करने से पहले और बाद में हाथ धोना चाहिए और इसे निर्धारित स्थान पर ही नष्ट करना चाहिए.



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