Korba News: ATM से कम नहीं तेंदू पत्ता, कोरबा के जंगल से बरस रहा हरा सोना, 15 दिन में कमाई…



कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिल रही है. तपती दोपहरों में जब ज़्यादातर लोग छांव ढूंढते हैं, गांव की महिलाएं और परिवार जंगल की ओर बढ़ते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि पेड़ों से गिरने वाले ये हरे पत्ते सिर्फ पत्ते नहीं, ‘हरा सोना’ हैं.

तपती धूप में मेहनत, और बदले में उम्मीदों की फसलहर साल की तरह इस बार भी तेंदू पत्ता संग्रहण का सीजन शुरू हो चुका है. बीड़ी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इन पत्तों की मांग हर साल तेजी से बढ़ती है. यही वजह है कि तेंदू पत्ता ग्रामीणों के लिए महज वनोपज नहीं, बल्कि कमाई का बड़ा ज़रिया बन चुका है.

गांव की महिलाएं, बुज़ुर्ग और युवा – सभी जंगलों में जाकर दिन भर मेहनत करते हैं और फिर संध्या होते-होते हरे पत्तों से भरे बोरे लेकर लौटते हैं. यह नज़ारा अब गांवों का एक सालाना उत्सव बन चुका है.

15 दिन में 30 हजार तक की कमाई, 60 करोड़ से ज्यादा का भुगतान तयवन विभाग के एसडीओ कंवर ने जानकारी दी कि इस बार प्रति मानक बोरा की कीमत 5500 रुपये तय की गई है. जिले के कोरबा और कटघोरा वन मंडलों में लगभग 50 से अधिक समितियां इस कार्य में लगी हैं. अनुमान है कि इस वर्ष संग्राहकों को 60 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा.

एक परिवार 15 दिनों में लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक की कमाई कर सकता है ये आंकड़ा ग्रामीण जीवन के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है.

सरकारी इंतजाम, ताकि पहुंचे हर हाथ में मेहनत की कमाईइस बार भुगतान की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. बैंक खाते में सीधे भुगतान, पहचान पत्र सत्यापन, और मौके पर सहायता केंद्र की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है.

इससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत की पूरी कीमत समय पर और बिना किसी परेशानी के मिल सकेगी.

तेंदू पत्ता: रोजगार का स्त्रोत और जीवन स्तर सुधारने का जरियातेंदू पत्ता संग्रहण ने ना सिर्फ स्थानीय रोजगार बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में बदलाव भी लाया है. अब वे इन पैसों से बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत, और रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा कर पा रहे हैं. यह सिर्फ एक योजना नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही है.



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