सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर: छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक स्थल.



Last Updated:May 19, 2025, 20:37 ISTDharohar: सिरपुर छत्तीसगढ़ का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है, जहां 5वीं शताब्दी में बना लक्ष्मण मंदिर है. इसे महारानी वासटा ने अपने पति की स्मृति में बनवाया था. इसे लाल ताजमहल के नाम से भी जाना जाता है.X

सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर हाइलाइट्ससिरपुर में 5वीं शताब्दी का लक्ष्मण मंदिर है.लक्ष्मण मंदिर को ‘लाल ताजमहल’ के नाम से जाना जाता है.सिरपुर में 21 शिव मंदिर, 10 बौद्ध विहार, 5 विष्णु मंदिर हैं.जांजगीर-चांपा: सिरपुर छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक है, जो अपने प्राचीन स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है. सातवीं सदी में यह स्थल पांडुवंशी शासकों की राजधानी हुआ करता था. सिरपुर का प्राचीन नाम ‘श्रीपुर’ है और यह पांचवीं शताब्दी के मध्य दक्षिण कौसल की राजधानी रह चुका है. छठी शताब्दी में चीनी यात्री व्हेनसांग भी यहां आए थे.

सिरपुर में भारत का सबसे पुराना ईंटों से बना मंदिर है, जिसे लक्ष्मण मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर अपनी निर्माण कला शैली के लिए विश्व विख्यात है. लक्ष्मण मंदिर को महारानी वासटा ने अपने पति की स्मृति में बनवाया था. आज भी लाल ईंटों से बना यह मंदिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस मंदिर में भगवान लक्ष्मण की शेषनाग रूप में मूर्ति स्थापित है.

लाल ईंटों के ताजमहल के नाम से प्रसिद्धइतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, सिरपुर में लाल ईंटों से बना यह लक्ष्मण मंदिर पूरे भारत में अपनी तरह का अनोखा और इकलौता मंदिर है. छत्तीसगढ़ में इसे लाल ईंटों के ताजमहल के नाम से भी जाना जाता है. पांचवीं शताब्दी में सिरपुर में पांडुवंशी राजाओं का शासन था. राजा हर्षगुप्त वैष्णव संप्रदाय से प्रेम करते थे, लेकिन वे शैव संप्रदाय से जुड़े हुए थे. जीवित रहते हुए राजा हर्षगुप्त ने अपनी महारानी वासटा देवी से इच्छा जताई थी कि उनकी मृत्यु के बाद एक मंदिर का निर्माण कराया जाए. महारानी वासटा देवी ने अपने पति की याद में सिरपुर में ईंटों से लक्ष्मण मंदिर का निर्माण करवाया था. महारानी वासटा देवी राजा सूर्यदेव की पुत्री और मगध की राजकुमारी थीं.

सिरपुर को तीनों धर्मों का संगम माना जाता है. सिरपुर के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में 21 शिव मंदिर, 10 बौद्ध विहार, 5 विष्णु मंदिर और एक जैन विहार मिला है, जो हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों की मौजूदगी को दर्शाता है. इसके साथ ही यहां पुराने तालाब की खुदाई में 6वीं से 9वीं शताब्दी की मूर्तियां मिली हैं. इन मूर्तियों को रखने के लिए लक्ष्मण मंदिर परिसर में 3 संग्रहालय बनाए गए हैं, जहां इन मूर्तियों को रखा गया है.
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