Chhattisgarh Famous Street Food: अगर आप भी कुछ चटपटा, मसालेदार और हेल्दी खाने की तलाश में हैं, तो जांजगीर की मशहूर “शाहरुख भेल” जरूर ट्राय करें. तेल से भरपूर स्नैक्स को छोड़कर जब लोग कुछ हल्का लेकिन तीखा खाना चाहते हैं, तब वे पहुंचते हैं ओमप्रकाश की भेल और झालमुड़ी की दुकान पर जिसे प्यार से पूरा शहर शाहरुख भेल के नाम से जानता है.
1999 से शुरू हुई ये स्वाद की कहानी, आज बन चुकी है पहचानदुकान के संचालक ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने इस काम की शुरुआत साल 1999 में केवल झालमुड़ी बेचने से की थी. समय के साथ लोगों के स्वाद को समझते हुए उन्होंने उसमें भेलपुरी, मटर, मक्का पोहा जैसी चीजें भी जोड़ दीं. खास बात ये है कि पूरे फुल प्लेट की कीमत सिर्फ ₹20 है जो ना केवल जेब के अनुकूल है बल्कि पेट भरने वाला भी.
कचहरी चौक की शामों की रौनक – ठेले से जुड़ी भावनाएंहर दिन शाम 3 बजे से रात 9 बजे तक ओमप्रकाश कचहरी चौक, तिवारी बालोद्यान के सामने अपना ठेला लगाते हैं. ठेले के सामने रोज़ाना भीड़ का आलम ऐसा होता है जैसे कोई बड़ा सेलिब्रिटी आ गया हो. लोग न केवल आसपास के क्षेत्रों जांजगीर, चांपा, अकलतरा, नवागढ़ से, बल्कि सिवनी, भड़ेसड़ जैसे गांवों से भी आते हैं.
भेलपूरी की रेसिपी: हर मसाले में छुपा है स्वाद का जादूओमप्रकाश ने बताया कि भेल में वो स्वाद लाने के लिए वह मुर्रा, मिक्सर, मक्का पोहा, मटर, बारीक कटे आलू-प्याज, हरी मिर्च, मसाला, नमक और खट्टी-मीठी इमली पानी का मिश्रण करते हैं. हर प्लेट को फ्रेश मिक्स करके ही दिया जाता है, जिससे उसका स्वाद बना रहता है और ग्राहकों को दोबारा आने पर मजबूर करता है.
नाम क्यों पड़ा ‘शाहरुख भेल’?लोग बताते हैं कि ओमप्रकाश का अंदाज़, ग्राहकों से बात करने की स्टाइल और उनका स्मार्ट काम करने का तरीका उन्हें शाहरुख खान की याद दिलाता है. तभी तो इलाके में उनकी भेल दुकान को “शाहरुख भेल” का नाम दे दिया गया और अब यह नाम खुद एक ब्रांड बन चुका है.
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