छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर रेलवे स्टेशन ने एक ऐतिहासिक करवट ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस नवनिर्मित स्टेशन का उद्घाटन किया, तो यह सिर्फ एक इमारत का लोकार्पण नहीं था बल्कि एक उम्मीद, एक विकास की दिशा में बढ़ा सशक्त कदम था. 6.29 करोड़ की लागत से सजा यह स्टेशन अब सिर्फ ट्रेनों के गुजरने का ठिकाना नहीं, बल्कि यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने वाला केंद्र बन चुका है.
ऐसे बदला स्टेशन, ऐसे निखरी सुंदरतास्टेशन का नजारा अब एकदम अलग है. भव्य प्रवेश द्वार से लेकर टाइल लगी चमचमाती ज़मीन तक, हर कोना नएपन से दमकता है. प्रतीक्षालयों को न केवल नया रूप दिया गया है, बल्कि उनमें यात्रियों के बैठने और विश्राम के लिए आरामदायक सुविधाएं जोड़ी गई हैं.
अब स्टेशन में क्या-क्या नया है?नई टिकट विंडो, बढ़ी हुई प्लेटफॉर्म की लंबाई, हाई मास्क लाइट, डिजिटल सूचना प्रणाली, सीसीटीवी सुरक्षा, सुंदर गार्डनिंग और लैंडस्केपिंग हर पहलू को ध्यान से संवारा गया है. खास बात ये है कि यहां सीताबेंगरा गुफाओं की प्रेरणा से बना एक आर्ट स्ट्रक्चर भी बनाया गया है, जो अब यात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.
इतिहास और विरासत से जुड़ाव भी बरकरारपुराने सरगुजा रियासत कालीन डिज़ाइन की झलक स्टेशन की दीवारों और बनावट में अब भी कायम है. यह एक ऐसा सामंजस्य है जिसमें परंपरा और आधुनिकता हाथ में हाथ डालकर खड़ी हैं.
भविष्य की योजनाएं भी तैयारस्टेशन के पुनर्विकास के साथ-साथ वहां एक और प्लेटफॉर्म की योजना स्वीकृत हो चुकी है. सांसदों की मांगों में बिलासपुर, रायपुर और शहडोल से ट्रेनों का विस्तार शामिल है, जिसे लेकर गंभीर प्रयास जारी हैं.
यात्रियों के अनुभव में क्रांतिकारी बदलावस्तनपान कक्ष, डिजिटल कोच डिस्प्ले, सुव्यवस्थित पार्किंग और बेहतर वेटिंग हॉल जैसी सुविधाएं इस स्टेशन को अब सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि सुविधाजनक यात्रा की शुरुआत बनाती हैं.
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