अबूझमाड़ नक्सली मुठभेड़: बसवा राजू था टारगेट, लोकेशन बदला, फिर भी नहीं बचा, अब बस्तर में क्या होगी गणपति की वापसी



रंजन दास

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ इलाके में सुरक्षाबल के जवानों में बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाया. नारायणपुर में हुई इस मुठभेड़ में जवानों ने 30 नक्सलियों को मार गिराया. नारायणपुर में हुई मुठभेड़ में जवानों ने 30 नक्सलियों को मार गिराया. इस मुठभेड़ में फोर्स ने नक्सलियों को टॉप लीडर बसवा राजू को भी ढेर कर लिया. बसवा पर 1 करोड़ का इनाम था. बताते हैं कि बसवा राजू के पिता एक टीचर थे. उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. स्टूडेंट लाइफ में वो नक्सलियों के कॉन्टैक्ट में आया. इसके बाद उसने कई खतरनाक वारदातों को अंजाम दिया. उसने सुरक्षाबलों पर कई अटैक प्लान किए, जिसमें कई जवान शहीद भी हुए.

बताया जा रहा है कि एक महीने से नक्सलियों के चीफ बसवा राजू को घेरने की तैयारी चल रही थी. सूत्रों की मानें तो बसवा को जवानों के मूवमेंट की भनक लग गई थी. वो हर 2 दिन में अपना लोकेशन लगातार बदल रहा था. फिर भी जवानों ने उसे घेरा और मार गिराया.

लिट्टे से लिया था ट्रेनिंग

बताते हैं कि 1980 में श्रीकाकुलम में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियम और एबीवीपी के बीच किसी बात को लेकर झड़प हुआ था. इस दौरान पहली बार बसवा राजू गिरफ्तार हुआ था. इसके बाद वो अंडर ग्राउंड हो गया. फिर धीरे-धीरे वो नक्सली गतिविधियों में एक्टिव हो गया. 1987 में एलटीटीई के लड़ाकों से उसने गुरिल्ला वॉर और विस्फोटक बनाने की बकायदा ट्रेनिंग ली थी. फिर उसने बम लोकल लेवल पर ही बनाना शूरू हो गया.

क्या बस्तर में होगी गणपति की वापसी?

कहते है बसवा राजू वही शख्स है जिसने बस्तर में नक्सल संगठन को मिलिट्री आर्मी का रूप दिया था. आईईडी प्लांट करने में माहिर इस नक्सली कमांडर ने लोकल लेवल पर नक्सल संगठन से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग भी दी थी. बताया जाता है कि 1987 में बस्तर के जंगल में LTT के पूर्व सैनिकों से विस्फोटक और घातक हमले की ट्रेनिंग उसने ली थी. तब से आज तक नक्सल गुरिल्ला वॉर की रणनीति पर काम करते आ रहे हैं. इधर, बसवा राजू की मौत के बाद अब माना जा रहा है कि बस्तर में फिर नक्सलियों के पूर्व जनरल सेक्रेट्री गणपति की वापसी हो सकती है. बसवा राजू के नेतृत्व में ही साल 2010 में ताड़मेटला की घटना को नक्सलियों ने दिया था अंजाम.

अबूझमाड़ ऑपरेशन में 2 जवान शहीद

नारायणपुर के अबूझमाड़ ऑपरेशन में 2 जवान शहीद हो गए. बीजापुर डीआरजी जवान रमेश हैमला आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आकर मौके पर शहीद हो गए. नारायणपुर डीआरजी के जवान खोटलू राम को मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी, वो भी शहीद हो गए. अबूझमाड़ ऑपरेशन में नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा जिले के जवान शामिल हुए थे.

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25 लाख का इनामी यासन्ना भी ढेर

अबूझमाड़ नक्सल ऑपरेशन में डीकेएसजेडसीएम (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का कुख्यात नक्सली कैडर यसन्ना उर्फ जंगू नवीन भी मारा गया. यसन्ना का असली नाम सज्जा वेंकट नागेश्वर राव था. 60 साल का राव आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले का रहने वाला था. उसके राजन्ना, मधु और यसन्ना कोड नाम से जाना जाता था. वह साउथ जोनल कमेटी का सदस्य था. छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर 25 लाख का इनाम घोषित किया था.



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