1.5 करोड़ का इनामी नक्सली, बम बनाने में उस्ताद, नाम से थरथर कांपते थे लोग, मिली ऐसी मौत, बन गई मिसाल



Narayanpur Naxal Encounter: घने जंगलों के बीच कहीं, जहां सूरज की किरणें भी जमीन पर पहुंचने से डरती हैं, वहीं पर बसी है एक दुनिया… एक ऐसी दुनिया जहां बंदूक की आवाजें लोरी बन चुकी थीं, और खून की धाराएं नदियों की तरह बहती थीं. यही है अबूझमाड़ छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का वह इलाका, जिसे भारत का सबसे रहस्यमय और खतरनाक क्षेत्र कहा जाता है. लेकिन 21 मई 2025 की  सुबह, इस जंगल ने एक अलग ही कहानी लिखी. जी हां, नक्सलियों और माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान में बुधवार को सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली. सुरक्षाबलों ने अब तक 27 नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें एक था बसवराजू, जिसके नाम से लोग कांपते थे.

सरकार ने भी उस पर रखा था 1.5 करोड़ रुपए का इनामबसवराजू कोई साधारण नक्सली नहीं था. वो B.Tech इंजीनियर था. AK-47 का शौकीन था, वारफेयर का उस्ताद था. उसकी वारफेयर की प्लानिंग ऐसी हुआ करती थी कि कई बार सुरक्षाबल भी उसके जाल में फंस जाते थे. यही वजह थी कि सरकार ने भी उस पर 1.5 करोड़ रुपए का इनाम रखा था. इस नक्सली का असली नाम था ‘नंवबल्ला केशव राव उर्फ बसवराजू’. वह एक पढ़ा-लिखा, रणनीतिकार और आधुनिक युद्धकला में प्रशिक्षित व्यक्ति.

LTTE से ली ट्रेनिंगबसवराजू ने श्रीलंका के तमिल संगठन लिट्टे (LTTE) से गुरिल्ला युद्ध और विस्फोटकों की ट्रेनिंग ली थी. बम बनाना, बारूदी सुरंग बिछाना, जंगल में गुरिल्ला युद्ध छेड़ना, ये सब उसके बाएं हाथ का खेल था. वह हमेशा अपने पास AK-47 रायफल रखता था. वह जितने चेहरों के साथ जिया, उतने ही नामों में पहचाना गया गनगन्ना, विजय, नरसिम्हा, कृष्णा, प्रकाश. पर एक चीज जो हर नाम के पीछे छुपी थी, वो थी खौफ. उसकी उम्र करीब 70 साल थी, लेकिन उसके इरादे आज भी जवान थे.

घर छोड़ा और फिर…1970 में घर छोड़ कर, उसने हथियार को अपना जीवन बना लिया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2018 में बसवराजू को CPI माओवादी का महासचिव बनाया गया. यह पद केवल नेतृत्व नहीं बल्कि पूरे संगठन की सैन्य दिशा तय करने की जिम्मेदारी भी थी. पिछले 24 सालों से वह पोलित ब्यूरो का सदस्य था, और संगठन के केंद्रीय सैन्य आयोग का प्रमुख भी. वह अपने हर हमले की योजना खुद बनाता, और उसके अनुसार नक्सली कार्रवाइयों को अंजाम देता. कई बार उसके हमले इतने अचानक और संगठित होते थे कि सुरक्षाबलों को संभलने का मौका भी नहीं मिलता.

बसवराजू की काली किताब के पन्नेदंतेवाड़ा हमला 2010: 6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के चिंतलनार में हुए इस हमले में 76 CRPF जवान शहीद हुए थे. यह आजाद भारत के सबसे घातक हमलों में से एक था. इस नरसंहार की योजना बसवराजू ने ही बनाई थी.

झीरम घाटी हमला 2013: 25 मई 2013 को कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हुए इस हमले में 29 लोगों की जान गई, जिनमें कई वरिष्ठ नेता शामिल थे.

अराकू हमला 2018: आंध्र प्रदेश के विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक एस. सोमा की हत्या भी बसवराजू की योजना थी।

गढ़चिरौली हमला 2019: महाराष्ट्र के इस हमले में 15 कमांडो शहीद हुए. 100 से ज्यादा नक्सलियों ने घात लगाकर यह हमला किया था, जिसकी स्क्रिप्ट भी बसवराजू ने ही लिखी थी.



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