antim sanskar rituals up to what age kids can be not be cremated in hindu religion bachcho ka dah sanskar kis age se hota hai।क्यों नहीं होता बच्चों का दाह संस्कार, किस उम्र के बाद निभाई जाती है ये परम्परा? जानें क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?



Antim Sanskar Rituals : भारत में जब किसी की मौत होती है तो उसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाता है. यह परंपरा सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और शरीर को धरती में मिलाने की प्रक्रिया मानी जाती है. मगर हिंदू धर्म में एक खास नियम ऐसा भी है जिसमें कुछ बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता. यह जानकर बहुत से लोग हैरान हो सकते हैं कि मौत के बाद भी कुछ बच्चों को जलाया नहीं जाता, बल्कि उन्हें दफनाया जाता है. इस आर्टिकल में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बताएंगे कि ऐसा क्यों होता है और कितनी उम्र तक के बच्चों पर यह नियम लागू होता है.

सोलह संस्कारों में से एकहिंदू धर्म में एक इंसान के जन्म से लेकर उसके अंतिम समय तक कई तरह के रिवाज होते हैं. इन्हें कुल मिलाकर सोलह संस्कार कहा जाता है. इन्हीं में एक होता है अंतिम संस्कार, जो आमतौर पर किसी की मृत्यु के बाद किया जाता है. लेकिन जब बात एक छोटे बच्चे की हो, तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है.

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2 साल की उम्रहिंदू धर्म के अनुसार, अगर किसी बच्चे की उम्र 2 साल से कम है और उसका निधन हो जाता है, तो उसका अंतिम संस्कार यानी शरीर को जलाने की परंपरा नहीं निभाई जाती. इसके बजाय ऐसे बच्चे को दफनाया जाता है. यह कोई मनमानी नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यता और ग्रंथों पर आधारित नियम है.

इसका कारण क्या है?हिंदू धर्म में माना जाता है कि जब कोई इंसान मरता है तो उसकी आत्मा शरीर को छोड़ देती है. लेकिन वह आत्मा अपने पुराने शरीर से जुड़ी रहती है और दोबारा उसमें लौटने की कोशिश कर सकती है. इसी वजह से शरीर को जलाया जाता है ताकि आत्मा को यह रास्ता न मिले और वह आगे बढ़ सके.

सम्मान के साथ दफनाया जाता हैलेकिन छोटे बच्चे, खासतौर पर 2 साल से कम उम्र के, अबोध माने जाते हैं. इनका किसी भी चीज या रिश्ते से कोई खास जुड़ाव नहीं होता. ऐसे बच्चों की आत्मा अपने शरीर से अलग होने पर उसमें दोबारा लौटने की कोशिश नहीं करती. यही वजह है कि इस उम्र तक के बच्चों को जलाया नहीं जाता, बल्कि सम्मान के साथ जमीन में दफनाया जाता है.

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क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?गरुड़ पुराण और दूसरे धार्मिक ग्रंथों में भी इसका जिक्र है कि इतने छोटे बच्चे का शरीर पंचतत्व में मिलाने की प्रक्रिया से नहीं गुजरता क्योंकि वह दुनिया की किसी भी चीज में उलझा नहीं होता. इसके अलावा, इस उम्र के बच्चे से जुड़ी चीजों को घर में रखना भी गलत नहीं माना जाता. माता पिता चाहें तो उसके खिलौने, कपड़े या अन्य यादें अपने पास रख सकते हैं.



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