Bilaspur News: शव को बोरे में रख बाइक से पहुंचे मर्चुरी…पुलिस की बेरूखी देख तमतमाए लोग



छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. तखतपुर के जूनापारा चौकी क्षेत्र में एक ग्रामीण की लापता होने के तीन दिन बाद लाश पहाड़ी पर क्षत-विक्षत अवस्था में मिली, लेकिन इससे भी ज्यादा दिल दहला देने वाला वो दृश्य था, जब शव को बोरे में भरकर परिजन खुद बाइक से मर्चुरी तक लेकर गए.

पुलिस की लापरवाही ने बढ़ाया दुखमृतक उमाशंकर साहू 15 मई को लकड़ी लेने गए थे और लौटे नहीं परिजनों ने तुरंत जूनापारा पुलिस चौकी में गुमशुदगी दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस ने ढिलाई बरती जब शव पहाड़ी क्षेत्र में मिला तो पुलिस ने मात्र औपचारिकता निभाई और शव परिजनों के हवाले कर वहां से रवाना हो गई.

‘शव के साथ ऐसा बर्ताव क्यों?’परिजनों की मजबूरी इस कदर बढ़ी कि उन्होंने शव को बोरे में रखा और बाइक से ही मर्चुरी तक पहुंचे यह दृश्य जिसने देखा, उसकी आंखें भर आईं इंसान की मौत के बाद उसे सम्मान तो मिलना ही चाहिए, लेकिन यहां तो उसे सड़क किनारे सामान की तरह ट्रीट किया गया.

मृतक के दामाद का दर्द– ‘सिस्टम ने मजबूर किया’उमाशंकर साहू के दामाद फागु राम साहू ने कहा कि हमने गुमशुदगी रिपोर्ट दी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली अब जब शव मिला, तो भी पुलिस ने बस उसे हमारे हवाले कर दिया. न कोई वाहन, न कोई सहारा, बस हम और हमारी मजबूरी सिस्टम ने हमें छोड़ा नहीं, धकेल दिया है.

गांव में उबाल, कार्रवाई की मांगइस शर्मनाक कांड के बाद गांव में गुस्सा फूट पड़ा है ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर हरकत में आती, तो शायद उमाशंकर की जान बचाई जा सकती थी अब वे पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई और जांच की मांग कर रहे हैं. उनकी नाराजगी जायज है, क्योंकि यह मामला केवल लापरवाही नहीं, इंसानियत की हत्या है.

यह सिर्फ एक केस नहीं, सिस्टम का आईना हैबिलासपुर की यह घटना न केवल एक परिवार का दुख है, बल्कि पूरे तंत्र की संवेदनहीनता का सबूत है सवाल यह है कि क्या अब भी प्रशासन जागेगा? क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह केस भी फाइलों में दम तोड़ देगा?

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