चिरौंजी की खेती: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सघन जंगलों में पाई जाने वाली चिरौंजी अब सिर्फ एक वनोपज नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक उन्नति की कहानी बन चुकी है. हर साल मई-जून में यह बीज पेड़ों पर आता है, और जंगलों में हलचल शुरू हो जाती है.
गांववालों की मेहनत ला रही फल, चिरौंजी बनी कमाई का ज़रियागर्मी की तपती दोपहरों में भी ग्रामीण पूरे जोश से पेड़ों पर चढ़ते हैं और चिरौंजी इकट्ठा करते हैं. महिलाएं और बच्चे भी इस काम में पीछे नहीं रहते. सिर्फ डेढ़ महीने की इस कमाई से गांव के कई परिवार अब आर्थिक रूप से सशक्त हो चुके हैं.
चिरौंजी के दामों में उछाल, बाजार में मचा है हड़कंपस्थानीय बाजारों में चिरौंजी 200 से 300 रुपए प्रति किलो बिक रही है. और जब इसे प्रोसेस कर बड़े शहरों में बेचा जाता है, तो कीमतें 3500 से 4000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती हैं. इसी वजह से जंगलों में चिरौंजी तोड़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
बिचौलियों का खेल: गांव वालों की मेहनत पर दूसरों की मलाईदुर्भाग्यवश, जानकारी की कमी के चलते कई ग्रामीण अपनी उपज औने-पौने दामों में बिचौलियों को बेच देते हैं. सेठ व्यापारी शहरों में इन्हीं बीजों को ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं. इसका सीधा नुकसान मेहनतकश ग्रामीणों को हो रहा है.
बाजार में बढ़ती डिमांड, गांव से शहर तक फैला व्यापारचिरौंजी की मांग कानपुर, बैंगलोर, नागपुर, दिल्ली जैसे शहरों में सबसे अधिक है. वहां की मिठाई, बेकरी और आयुर्वेदिक कंपनियां इसे बड़े पैमाने पर खरीदती हैं. यही वजह है कि सरगुजा संभाग की चिरौंजी अब राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुकी है.
कठिन मेहनत का मीठा फल… एक पेड़ से मिलते हैं 10 किलो बीजएक पेड़ से औसतन 10 किलो बीज निकलता है, जिसे निकालने में काफी मेहनत लगती है. चिरौंजी का पौधा तैयार होने में 5 साल लेता है, लेकिन इसके बाद यह लंबे समय तक किसानों की आय का स्थायी साधन बन सकता है.
प्राकृतिक आपदाएं और उत्पादन पर असरइस साल बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने चिरौंजी की पैदावार को थोड़ा प्रभावित किया है. फूल गिरने से फल कम लगे हैं, लेकिन फिर भी चिरौंजी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे ग्रामीणों को कम पैदावार में भी अच्छा लाभ मिल रहा है.
सरकारी पहल, लेकिन जानकारी का अभावसरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय ने माना कि सरकार वन उपज की खरीदी के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन चयनित स्थानों और जानकारी की कमी के चलते ग्रामीण अभी भी बिचौलियों के भरोसे हैं. उन्होंने अपील की है कि किसान सीधे शासन को उपज बेचें.
स्वास्थ्य और स्वाद का खजाना है चिरौंजीचिरौंजी सिर्फ पैसे कमाने का साधन नहीं, यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है. इसका पाउडर मिठाइयों, बिस्कुट और औषधीय उत्पादों में बड़े पैमाने पर उपयोग होता है. यही कारण है कि इसकी मांग साल-दर-साल बढ़ती जा रही है.
जागरूकता ही असली ताकत…चिरौंजी से बदलेगा गांव का भविष्यचिरौंजी जैसे प्राकृतिक उपहार अगर सही दिशा में इस्तेमाल किए जाएं तो गांव के हालात पूरी तरह बदल सकते हैं. जरूरत है तो सिर्फ जागरूकता, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की पहुंच को गहराई तक ले जाने की.