Drone Farming: ड्रोन से मात्र 6 मिनट में दवाई का छिड़काव, खुल सकता है कमाई का नया जरिया, पानी की होगी कम खपत



Last Updated:May 05, 2025, 19:12 ISTDrone Farming: खेती में ड्रोन का उपयोग खासकर पेस्टीसाइड छिड़काव और ग्रेन्यूल्स वितरण जैसे कार्यों में अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है.  जहां एक एकड़ खेत में पेस्टीसाइड छिड़कने में लगभग तीन घंटे और बड़ी मात्रा में…और पढ़ेंX

ड्रोन से आधुनिक खेतीहाइलाइट्सछत्तीसगढ़ में ड्रोन से मात्र 6 मिनट में एक एकड़ में पेस्टीसाइड का होगा छिड़कावड्रोन तकनीक से खेती में पानी की कम होगी खपतमारुट कंपनी के ड्रोन से 20-30 एकड़ में छिड़काव संभव रायपुर. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खेती अब टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने वाली है. बदलते दौर में जहां देश के कई राज्यों में खेती में ड्रोन का चलन बढ़ रहा है, वहीं अब छत्तीसगढ़ के किसान भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कृषि क्षेत्र में ड्रोन टेक्नोलॉजी एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है, जिससे खेती के कई कठिन कार्य अब चंद मिनटों में पूरे किए जा सकते हैं.

ड्रोन से होगा खेती का डिजिटलीकरणफ्लाइंग अफसर (रिटायर्ड) नित्यानंद जायसवाल बताते हैं कि शुरुआत में जब कोई नई तकनीक आती है, तो किसानों के लिए उसे अपनाना आसान नहीं होता. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 30-40 साल पहले जब ट्रैक्टर आया था, तब भी किसानों को उसे अपनाने में समय लगा था. उसी तरह आज ड्रोन तकनीक को लेकर भी शुरुआत में झिझक है, लेकिन यह भविष्य की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि खेती में ड्रोन का उपयोग खासकर पेस्टीसाइड छिड़काव और ग्रेन्यूल्स वितरण जैसे कार्यों में अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है.  जहां एक एकड़ खेत में पेस्टीसाइड छिड़कने में लगभग तीन घंटे और बड़ी मात्रा में पानी खर्च होता है, वहीं ड्रोन के माध्यम से यही काम महज 6 मिनट में पूरा किया जा सकता है. इसके साथ ही पानी की खपत भी काफी कम होती है.

किसानों के लिए उपलब्ध है मारुट कंपनी की ड्रोन हैदराबाद बेस्ड मारुट कंपनी की ड्रोन विगत फरवरी माह से छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए उपलब्ध है. यह ड्रोन मशीनें विशेष रूप से किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन की गई हैं. एक दिन में 20 से 30 एकड़ में छिड़काव करने की क्षमता रखने वाली ये मशीनें खेती को न केवल आसान बना रही हैं, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत कर रही हैं.

ड्रोन बन सकता है कमाई का जरियाफ्लाइंग अफसर (रिटायर्ड) नित्यानंद जायसवाल ने आगे बताया कि ड्रोन तकनीक किसानों के लिए सिर्फ सुविधा ही नहीं, बल्कि इंटरप्रेन्योरशिप का अवसर भी बन सकती है. कोई भी किसान या युवा इन्हें किराए पर लेकर दूसरे किसानों की मदद कर सकता है और खुद का व्यवसाय शुरू कर सकता है.

गांव-गांव तक पहुंच सकती है यह तकनीकसरकार यदि प्रशिक्षण और सब्सिडी के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करे, तो यह तकनीक गांव-गांव तक पहुंच सकती है. छत्तीसगढ़ की खेती अब बदलाव की दहलीज पर खड़ी है. ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीक को अपनाकर किसान अपनी उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, लागत घटा सकते हैं और खेती को लाभकारी बना सकते हैं. सही मार्गदर्शन और पहल से यह तकनीक किसानों की किस्मत बदल सकती है.
Location :Raipur,Raipur,Chhattisgarhhomeagricultureछत्तीसगढ़ की खेती में टेक्नोलॉजी की उड़ान, अब ड्रोन से होगी आधुनिक कृषि



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