Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 Date muhurat siddh yog chand nikalne ka time significance of jyeshtha krishna Chaturthi : 16 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी, सिद्ध योग में गणेश पूजा, देखें मुहूर्त, चांद निकलने का समय



एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ति​थि को रखा जाता है. यह मई का संकष्टी चतुर्थी है, इसे ज्येष्ठ की संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं. एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत 16 मई शुक्रवार को है. इस दिन सिद्ध योग और साध्य योग बनेंगे. पूजा के समय मूल नक्षत्र है. संकष्टी चतुर्थी में रात के समय चंद्रमा की पूजा का विधान है. इसके बिना संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूरा नहीं होता है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं संकष्टी चतुर्थी के पूजा मुहूर्त और चांद निकलने के समय के बारे में.

मई संकष्टी चतुर्थी 2025 तारीख

पंचांग के अनुसार, 16 मई को तड़के 4 बजकर 2 मिनट पर ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ति​थि का शुभारंभ होगा. यह तिथि अगले दिन 17 मई को सुबह 5 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत 16 मई शुक्रवार को है.

2 शुभ योग में है एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2025

एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन सिद्ध और साध्य योग बन रहे हैं. सिद्ध योग प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से साध्य योग होगा. एकदंत संकष्टी चतुर्थी की पूजा आप सिद्ध योग में कर सकते हैं, जबकि चंद्रमा का अर्घ्य साध्य योग में दिया जाएगा. एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर मूल नक्षत्र शाम को 04:07 पी एम तक रहेगा, उसके बाद पूर्वाषाढा नक्षत्र है.

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एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2025 मुहूर्त

संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:06 ए एम से 04:48 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:50 ए एम से दोपहर 12:45 पी एम तक है. उस दिन का निशिता मुहूर्त रात में 11 बजकर 57 मिनट से देर रात 12 बजकर 38 मिनट तक है. व्रत के दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 07:12 ए एम से 08:54 ए एम तक है, उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 08:54 ए एम से 10:36 ए एम तक है.

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2025 चांद निकलने का समय

एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को चांद के निकलने का इंतजार रहता है. कृष्ण पक्ष का चंद्रमा देर से निकलता है. एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय रात 10 बजकर 39 मिनट पर होगा. इस समय में आप चंद्रमा को अर्घ्य दें और पूजा करें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

संकष्टी चतुर्थी पर शिववास का समय

संकष्टी चतुर्थी के दिन शिववास कैलाश पर रहेगा. उस दिन प्रात:काल से लेकर अगले दिन शनिवार को सुबह 5 बजकर 13 मिनट तक शिववास कैलाश पर है. उसके बाद शिववास नंदी पर है. शिववास होता है तो रुद्राभिषेक करते हैं.

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संकष्टी चतुर्थी का महत्व

हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत होता है. इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करते हैं, जिससे सभी प्रकार के कष्ट, रोग, दोष मिटते हैं. गणेश जी की कृपा से सब संकट मिटते हैं और जीवन में शुभता आती है. गणेश जी को एकदंत भी कहते हैं क्योंकि परशुराम जी ने फरसा से उनके दांत पर प्र​हार कर दिया था, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट गया. तब से गणपति एकदंत कहलाने लगे.



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