कोई भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने का विधान है. साथ ही कोई त्योहार हो या देवी देवता की पूजा का कार्यक्रम, उसमें भी भगवान गणेश की ही पहले पूजा की जाती है. भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि नाम लेने मात्र से सभी विघ्न व बाधाएं दूर हो जाती हैं और हर कार्य सिद्ध हो जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, आप जो भी कार्य शुरू करने जा रहे हों या पूजा कर रहे हों तो उससे पहले गणेश ध्यान मंत्र का अवश्य जप करना चाहिए. गणेश ध्यान मंत्र को बेहद शक्तिशाली और चमत्कारिक माना जाता है. आइए जानते हैं गणेश ध्यान मंत्र और मंत्र जप विधि…
गणेश ध्यान मंत्रॐ शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥अर्थ: जो श्वेत वस्त्रधारी हैं, जिनका स्वरूप श्रीहरि विष्णु के समान है, जिनका रंग चंद्रमा के समान उज्ज्वल है, जिनके चार भुजाएं हैं और जो सदा प्रसन्न मुद्रा में हैं, ऐसे श्री गणेश जी का हम ध्यान करते हैं, जो हमारे सभी विघ्नों को शांत कर देते हैं.
ॐ एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्।विध्ननाशं करिष्यन्तं देवं वन्दे गणाधिपम्॥अर्थ: एक दंत, विशाल शरीर वाले, लंबोदर और गजानन स्वरूप वाले, सभी विघ्नों को दूर करने वाले गणाधिपति देवता गणेश जी को मैं नमस्कार करता हूँ.
गणेश ध्यान मंत्र जपने के लाभ:– कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं– बुद्धि, विवेक और स्मरण शक्ति बढ़ती है– पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलती है– मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है– शुभ कार्यों की शुरुआत में अनिवार्य रूप से प्रयोग होता है
जप विधि:– प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें– एक शांत स्थान पर आसन लगाएं– श्री गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं– 11, 21 या 108 बार ध्यान मंत्र का जप करें– मन में श्री गणेश जी का ध्यान करते रहें
इस मंत्र का प्रयोग कब करें– किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में– पूजा, पाठ, हवन, विवाह, गृह प्रवेश आदि से पहले– मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए