बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की चकरभाठा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 3 की हालत बेहद दयनीय है. एक तरफ तो सरकार हर बच्चे को प्राथमिक शिक्षा और पोषण देने का दावा करती है और दूसरी तरफ आंगनबाड़ी केंद्रों का बुरा हाल है. यहां बिना बिजली, पंखा और मूलभूत सुविधाओं के बच्चे तपती गर्मी में पढ़ने को मजबूर हैं. यह बच्चों की सेहत के लिए खतरा है. यह शासन-प्रशासन की नाकामी को भी उजागर करती है.
2015 से अब तक नहीं मिला बिजली कनेक्शनस्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बच्चों की माताओं के अनुसार, वर्ष 2015 में यह सेंटर बना लेकिन तब से आज तक यहां बिजली कनेक्शन नहीं हो पाया. यही वजह है कि यहां गर्मी से राहत के लिए एक पंखा तक नहीं लगा है. कहने को तो अब सौर ऊर्जा से गांव-गांव बिजली पहुंच रही है लेकिन, बिलासपुर के चकरभाठा इन सभी सुविधाओं से कोसों दूर है.
बच्चों को हो रही है स्किन से जुड़ी बीमारी और आ जाता है चक्करमई की इस झुलसाती गर्मी में आंगनबाड़ी सुबह 7 से 11 बजे तक खुलती है. सुबह का तो ठीक है लेकिन 9-10 बजे के बाद से बच्चे बेहाल होने लगते हैं. गर्मी के कारण कई बच्चों को घमोरिया हो रही हैं. बच्चों और उनकी माताओं ने बताया कि पंखा नहीं होने की वजह से बच्चे बहुत परेशान होते हैं और कई बार चक्कर तक आ जाते हैं.
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फर्श से पैरों में लगती है चोट, शौचालय है फेलइस आंगनबाड़ी केंद्र की फर्श उखड़ चुकी है. इससे छोटे बच्चों को चलने में बार-बार चोट लगती है. साफ-सफाई और रख-रखाव से कोई मतलब नहीं है. यहां बना एकमात्र शौचालय भी पूरी तरह फेल है. उसका टैंक धंस गया है, जिससे बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. यह न सिर्फ अस्वस्थ है, बल्कि बच्चों की गरिमा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है.
कार्यकर्ता और सहायिका ने भी जताई चिंताआंगनबाड़ी में कार्यरत कलिंदरी वैष्णव और सहायिका संतोषी ने बताया कि उन्होंने कई बार यह शिकायत अपने सुपरवाइजर को दी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि दो महीने के लिए आंगनबाड़ी को बंद कर देना चाहिए ताकि बच्चों को राहत मिल सके भले ही उनका वेतन रोक दिया जाए.
सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी ने मानी समस्यासुपरवाइजर भारती मेश्राम और महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी दिव्या पांडे ने बातचीत में माना कि यह समस्या सिर्फ चकरभाठा की नहीं, पूरे क्षेत्र की है. लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, शौचालय और अन्य सुविधाएं नहीं हैं. उन्होंने बताया कि वे कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला.
केंद्र क्रमांक 1 की हालत और भी खराबचकरभाठा बस्ती के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 1 की हालत और भी खतरनाक है. वहां की छत से पानी टपकता है और छज्जा टूट-टूट कर गिर रहा है. किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है.
नन्हे बच्चों का क्या कसूर?सरकारें एसी दफ्तरों में बैठकर योजनाओं की समीक्षा करती हैं लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही है. जिन नन्हे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए वे बिना पंखा, बिना बिजली और असुरक्षित वातावरण में समय काटने को मजबूर हैं. यह सवाल शासन और प्रशासन दोनों से पूछा जाना चाहिए कि इन बच्चों ने क्या गुनाह किया है?
छत्तीसगढ़ की स्थापना के 24 साल बाद भी अगर बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बन सके हैं तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है. सरकार को चाहिए कि वह इस समाचार को चेतावनी के रूप में ले और तत्काल कार्रवाई कर इन मासूमों को राहत दे.