Last Updated:May 03, 2025, 07:01 IST1989 में पर्थ के मैदान पर एक ऐसी घटना हुई जिसको देखकर आपको ढर भी लगेगा और हंसी भी आएंगी. न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज की जब बल्लेबाजी आई तो सामने कॉर्ल रैकमैन के हा…और पढ़ें1989 में डैनी मौरिसन ने ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज रैकमैन की गेंद को हेलमेट से डिफेंस किया हाइलाइट्स1989 में पर्थ में मॉरिसन ने हेलमेट से गेंद डिफेंड की.मॉरिसन अब आईपीएल में कमेंट्री कर रहे हैं.मॉरिसन का अनोखा डिफेंस क्रिकेट इतिहास में यादगार है.नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर तमाम ऐसी घटनाओं का जिक्र है जिसको याद करके आपको हंसी भी आएगी वहीं कुछ तस्वीरें है जिसको देखकर और याद करके आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे . कुछ ऐसी ही घटना 1989 में ऑस्ट्रेलिया में हुई जिसको याद करके पहले आपको हंसी भी आएगी फिर आप सोचेंगे कि वो शख्स बचा होगा कि नहीं. चलिए पहले आपको ये बता देते है कि वो शख्स सेफ है और आईपीएल में कॉमेंट्री कर रहा है.
अस्सी के दशक में हेलमेट का इस्तेमाल शुरु हो गया था पर किसी को क्या पता था कि इस हेलमेट से गुडलेंथ की बॉल को डिफेंस भी किया जा सकता है पर ऐसा हुआ. 24 नंवबर1989 को पर्थ में न्यूजलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच में एक ऐसी घटना हुई जिसको देखकर हर किसी ने दांतों तले उंगली दबा ली थी.
हेलमेट से किया गया फॉर्वर्ड डिफेंस
क्रिकेट में कार्ल रैकेमैन और डैनी मॉरिसन के बीच सबसे प्रसिद्ध घटना 1989 के एक मैच की है, जिसमें मॉरिसन ने “हेलमेट फॉरवर्ड डिफेंस” खेला और रैकेमैन द्वारा फेंकी गई गेंद पर सिर से वार किया.मॉरिसन के अपरंपरागत डिफेंस के कारण एक हास्यपूर्ण और यादगार पल सामने आया.ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच मैच के दौरान, न्यूज़ीलैंड के क्रिकेटर डैनी मॉरिसन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ कार्ल रैकमैन की गेंद का सामना कर रहे थे. गेंद को बचाने के प्रयास में मॉरिसन ने अपना सिर आगे की ओर झुकाया और गेंद को अपने हेलमेट से टकराया, जिसके परिणामस्वरूप एक मज़ेदार और असामान्य “हेलमेट फ़ॉरवर्ड डिफेंस” हुआ.इस घटना की व्यापक रूप से रिपोर्टिंग की गई और यह क्रिकेट इतिहास में एक यादगार पल का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया. मॉरिसन का असामान्य बचाव और गेंद पर हेडबट, प्रशंसकों और कमेंटेटरों दोनों के लिए मनोरंजन का स्रोत बन गया.एक ‘बल्लेबाज’ के तौर पर मॉरिसन की सबसे ‘उल्लेखनीय’ ‘उपलब्धि’ यह है कि उन्होंने एक बार टेस्ट मैचों में शून्य पर आउट होने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने जो 48 टेस्ट मैच खेले, उनमें से 24 पारियों में वे बिना कोई रन बनाए आउट हो गए.