ज्येष्ठ अमावस्या का पावन पर्व ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होता है. इस दिन पितरों की पूजा करने का विधान है. पितृ पूजन के दिन मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा. यह योग केवल 7 मिनट के लिए ही होगा. यदि ज्येष्ठ अमावस्या पर आपको कोई शुभ कार्य करना है तो इस योग में कर सकते हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल सिद्ध होते हैं, ऐसी ज्योतिष मान्यता है. आइए जानते हैं कि इस साल ज्येष्ठ अमावस्या कब है? ज्येष्ठ अमावस्या का मुहूर्त, तर्पण समय और महत्व क्या है?
ज्येष्ठ अमावस्या किस दिन है 2025?
काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर पितर धरती पर आते हैं, इसलिए उनके लिए तर्पण, स्नान, दान, श्राद्ध कर्म आदि करते हैं. इस अवसर पर पितरों के देवता अर्यमा की भी पूजा करने का विधान है. जो लोग ऐसा करते हैं, उनको पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पितृ दोष दूर होता है.
दृक पंचांग के अनुसार, 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ होगा. यह तिथि अगले दिन 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर ज्येष्ठ अमावस्या 27 मई मंगलवार को है. यह भौमवती अमावस्या है. हालांकि ज्येष्ठ अमावस्या का समापन 28 मई को सुबह 08:31 ए एम पर हो जा रहा है तो ज्येष्ठ की दर्श अमावस्या 26 मई सोमवार को है.
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ज्येष्ठ अमावस्या 2025 तर्पण समय
जो लोग ज्येष्ठ अमावस्या पर अपने पितरों के तर्पण करना चाहते हैं, वे लोग 27 मई को अमावस्या तिथि के समापन से पूर्व तर्पण कर लें. उस दिन सूर्योदय 05:25 ए एम पर होगा. ऐसे में आप स्नान करने के बाद पितरों के लिए तर्पण करें. तर्पण में जल, काले तिल, सफेद फूल और कुशा का उपयोग करते हैं. कुशा के पोरों से तर्पण देते हैं, जिसे पाकर पितर तृप्त होते हैं. पितर खुश होकर उन्नति का आशीर्वाद देते हैं.
ज्येष्ठ अमावस्या 2025 मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:03 ए एम से 04:44 ए एम तक है. यह स्नान और दान के लिए शुभ फलदायी माना जाता है. अमावस्या के दिन का शुभ मुहूर्त यानि अभिजीत मुहूर्त 11:51 ए एम से 12:46 पी एम तक है.
3 शुभ योग में है ज्येष्ठ अमावस्या 2025
इस साल की ज्येष्ठ अमावस्या पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. सुकर्मा योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और द्विपुष्कर योग बनेंगे. उस दिन सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर रात 10 बजरक 54 मिनट तक है, उसके बाद से धृति योग बनेगा. वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 05 बजकर 25 मिनट से बनेगा, जो 05 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. यह योग केवल 7 मिनट के लिए है. अमावस्या तिथि में द्विपुष्कर योग 28 मई को 05:02 ए एम से 05:25 ए एम तक रहेगा. ज्येष्ठ अमावस्या पर कृत्तिका नक्षत्र 05:32 ए एम तक है, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र 28 मई को तड़के 02:50 ए एम तक है.
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ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व
1. ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों को खुश करने के लिए तर्पण, पिंडदान, पंचबलि कर्म, श्राद्ध कर्म, ब्राह्मण भोज, स्नान, दान आदि करते हैं.
2. ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए हर साल ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाती है.
3. ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर ही वट सावित्री का व्रत रखा जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत रखकर देवी सावित्री, बरगद के पेड़ और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करती हैं.